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ईडीआईआई के सहयोग से ‘सूरत कट (डायमंड)’ को जीआई प्रमाणपत्र, 5 शिल्पों को मिला टैग

देहरादून,17 मार्च 2026: Entrepreneurship Development Institute of India (ईडीआईआई), अहमदाबाद ने पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण और कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के सहयोग से ‘सूरत कट (डायमंड)’ को भौगोलिक संकेत (जीआई) प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है, जबकि अब तक कुल 5 शिल्पों को जीआई टैग दिलाने में भी सहायता दी गई है।
ईडीआईआई द्वारा 13–14 मार्च को Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (एमएसएमई मंत्रालय) के समर्थन से ‘आईपी यात्रा’ नामक दो दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। IP Promotion Outreach Foundation के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से 500 से अधिक हितधारकों—एमएसएमई, स्टार्टअप, कारीगर, शिक्षाविद और उद्योग प्रतिनिधियों—ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान Unnat Pandit, कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिज़ाइन्स एंड ट्रेड मार्क्स ने ‘सूरत कट (डायमंड)’ का जीआई प्रमाणपत्र सूरत डायमंड एसोसिएशन को प्रदान किया। भारत का सूरत डायमंड उद्योग वैश्विक स्तर पर अहम भूमिका निभाता है और देश के लगभग 90% पॉलिश्ड डायमंड उत्पादन के लिए जाना जाता है।
इस अवसर पर टंगालिया शॉल और माता नी पछेड़ी जैसे पारंपरिक शिल्पों से जुड़े कारीगरों को भी जीआई अधिकृत उपयोगकर्ता प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि जीआई टैग से न केवल उत्पादों को पहचान मिलती है, बल्कि कारीगरों की आय और बाजार पहुंच में भी वृद्धि होती है।
ईडीआईआई ने अब तक गुजरात सूफ एम्ब्रॉयडरी, अहमदाबाद सोदागरी ब्लॉक प्रिंट, भरूच सुजनी वीविंग, सूरत सदेली क्राफ्ट और ‘सूरत कट (डायमंड)’ सहित 5 शिल्पों को जीआई टैग दिलाने में सहयोग किया है। इसके अलावा 15 अन्य शिल्पों और कृषि उत्पादों के लिए जीआई टैगिंग की प्रक्रिया जारी है।
संस्थान द्वारा नाबार्ड समर्थित क्षेत्रीय जीआई फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना भी की गई है, जो कारीगरों और उद्यमियों को प्रशिक्षण, पंजीकरण और विपणन सहायता प्रदान कर रहा है। पिछले छह महीनों में इस केंद्र के माध्यम से 3 लाख रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई है।
ईडीआईआई के महानिदेशक Sunil Shukla ने कहा कि पेटेंट और जीआई टैगिंग हमारे पारंपरिक ज्ञान और नवाचार की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर दिया कि विचार से नवाचार और फिर व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ना ही आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा पेटेंट रणनीति, आईपी संरक्षण और व्यवसायिक विकास में बौद्धिक संपदा की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिससे उद्यमियों और नवप्रवर्तकों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला।

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