खनन पट्टे को लेकर 15-20 गांव के ग्रामीणों में रोष, तटबंध ठीक ना कराने पर लखनऊ तक करेंगे पैदल मार्च – खादर खाप चौधरी
शामली। तहसील ऊन के बिडौली क्षेत्र के ग्राम मंगलौर क्षेत्र में यमुना खादर में जारी खनन पट्टे को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंगलवार को मंगलौरा गांव में आसपास के कई गांवों के लोगों की एक बड़ी पंचायत आयोजित हुई, जिसमें 2 अप्रैल से शुरू होने वाले पांच वर्षीय खनन पट्टे का विरोध करते हुए कड़ा ऐलान किया गया।
पंचायत में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि यदि 2 अप्रैल तक प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो 3 अप्रैल को ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए लखनऊ के लिए कूच करेंगे। इस संबंध में यमुना खादर खाप के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने स्पष्ट कहा कि “यदि अधिकारियों ने समय रहते टूटे हुए स्टड (सुरक्षा तटबंध) और ठोकरों को सही नहीं कराया तथा खनन का रास्ता नाइन नगला से नहीं निकाला, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 1970 के दौरान बनाए गए यमुना तटबंध के स्टड और ठोकरों को अवैध खनन माफियाओं द्वारा तोड़कर रास्ता बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पंचायत में इन संरचनाओं को तत्काल दुरुस्त कराने और खनन का रास्ता मंगलौरा गांव से न निकालने की मांग उठाई गई।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले की लिखित शिकायत एक दिन पूर्व जिलाधिकारी को दी जा चुकी है, साथ ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी बाढ़ में मंगलौरा सहित 15-20 गांवों पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
पंचायत में यह भी कहा गया कि खनन पट्टा ग्राम नाइन नगला में प्रस्तावित है, इसलिए रास्ता भी वहीं से निकाला जाए। लेकिन वर्तमान में करीब 5 किलोमीटर दूर मंगलौरा गांव से रास्ता निकालने की तैयारी की जा रही है, जिससे ओवरलोड वाहनों के कारण तटबंध को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अवैध खनन से हजारों बीघा फसल प्रभावित होगी और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। ऐसे में यदि प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 3 अप्रैल को यमुना का जल साथ लेकर ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए लखनऊ पहुंचेंगे और उच्च अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखेंगे।
रिर्पोट : सिद्धार्थ भारद्वाज प्रभारी दिल्ली एनसीआर।
