कांवड़ियों की सेवा में भारत विकास परिषद ने लगाए दो निशुल्क चिकित्सा एवं भंडारा शिविर
भगवानपुर, 5 अगस्त। सावन मास में कांवड़ियों की सेवा के उद्देश्य से भारत विकास परिषद, मां चूड़ामणि देवी शाखा, भगवानपुर की ओर से बुधवार को बीडी इंटर कॉलेज भगवानपुर तथा नीलकंठ ढाबा, इमली रोड के समीप दो निशुल्क तीन दिवसीय चिकित्सा एवं जलपान शिविर तथा भंडारे का शुभारंभ किया गया। शिविर के माध्यम से कांवड़ यात्रियों को चिकित्सा सुविधा, निशुल्क दवाइयां, जलपान एवं भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिविर के पहले दिन 1500 से अधिक शिवभक्त कांवड़ियों को निशुल्क दवाइयां वितरित करने के साथ जलपान कराया गया। परिषद के सदस्यों ने कांवड़ यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनकी सेवा की।
भारत विकास परिषद, उत्तराखंड पश्चिम प्रांत के महासचिव संजय गर्ग ने कहा कि सावन मास में शिवभक्त कांवड़ियों की सेवा का विशेष धार्मिक महत्व है। कांवड़ियों की सेवा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
प्रांतीय मीडिया प्रभारी संजय पाल ने कहा कि शिवभक्त कांवड़िए गंगोत्री और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने स्थानीय शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यात्रा के दौरान कांवड़िए नंगे पैर लंबी दूरी तय करते हैं और गर्मी सहित अनेक कठिनाइयों का सामना करते हैं। इसके बावजूद उनकी आस्था और श्रद्धा उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती है।
परिषद के अध्यक्ष पुष्पराज सिंह चौहान ने कहा कि कांवड़ियों की सेवा का अर्थ उनकी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन, पानी, आश्रय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
परिषद की सचिव श्रीमती कल्पना सैनी ने कहा कि कांवड़ियों की सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि इससे समाज में एकता, सहयोग और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है। उपाध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि कांवड़ यात्रा विश्व की सबसे बड़ी पैदल यात्राओं में से एक है, जो लोगों को एक-दूसरे के प्रति सहयोग और सहानुभूति का भाव सिखाती है।
इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष अमरीश चौहान, वित्त सचिव लोकेश, संगठन सचिव सुधीर सैनी, ओम सिंह, श्रीमती निधि धीमान, श्रीमती संगीता गुप्ता, सैयद त्यागी, बृजमोहन, हर्षित शर्मा, वसीम, पायल, राजकुमार, रोहित, अशोक, लोकेश सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे और कांवड़ यात्रियों की सेवा में योगदान दिया।
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