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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित

पीएम श्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि योजनाओं का लाभ फाइलों में नहीं, किसानों की लाइफ में दिखे- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह

*​डिजिटल क्रांति का ऐतिहासिक मील का पत्थर: देश में बने 10.77 करोड़ से अधिक ‘फार्मर आईडी’, सीधे किसानों की जेब तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ- शिवराज सिंह*

*​इसी महीने शुरू होगा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’; केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दिए पुख्ता तैयारी के निर्देश, किसानों को मिले अधिकतम लाभ*

*​दलहन और तिलहन मिशनों की समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान बोले- देश को खाद्य तेलों और दालों में बनाएंगे पूर्ण आत्मनिर्भर*

*​प्राकृतिक खेती को मिला बड़ा समर्थन: लक्ष्य पार कर 27.32 लाख किसान और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जुड़ा, 33 हजार कृषि सखियां तैनात- शिवराज सिंह*

*​PM-RKVY पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का भरोसा: “पीएम मोदी के नेतृत्व में कृषि विकास के लिए राज्यों को धन की कमी नहीं होगी”*

*​प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) पर किसानों का विश्वास मजबूत: नामांकन 23% बढ़कर 2.83 करोड़ पार, शिवराज ने दिए त्वरित क्लेम के निर्देश*

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*​लैब से लैंड की दूरी मिटाने को शिवराज सिंह चौहान की नई पहल: KVK, ‘आत्मा’ और कृषि विश्वविद्यालय ‘एक टीम’ बनकर उतरें खेत में*

*​एआईएफ (AIF) में 1.01 लाख करोड़ रुपए के ऋण से गांवों में खड़ा हुआ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर; रिकॉर्ड 30 लाख किसान FPO से जुड़े- शिवराज सिंह*

*​मखाना विकास मिशन का कमाल: किसानों को मिलने लगा तीन गुना तक अधिक दाम; ट्रेनिंग की जमीनी गुणवत्ता परखने के लिए शिवराज सिंह ने दिए निर्देश*

*​सुस्त राज्यों और जिलों को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की हिदायत: “पीएम मोदी की योजनाओं का लाभ हर किसान तक पहुंचे, जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्रियों से करूंगा बात”*
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*नई दिल्ली,5 अक्टूबर 2026,* केंद्र सरकार की कृषि नीतियों का मूल मंत्र किसानों को सीधी आर्थिक सहायता, सुलभ संस्थागत ऋण, डिजिटल सशक्तिकरण, आधुनिक ग्रामीण ढांचा, प्राकृतिक खेती, मजबूत किसान उत्पादक संगठन (FPO) और दलहन-तिलहन में देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। इस उद्देश्य को जमीन पर साकार करने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कृषि भवन में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “फाइल में नहीं, लाइफ में बदलाव” के दृष्टिकोण को आधार बनाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्येय केवल उत्पादन के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि आयात पर विदेशी निर्भरता को समाप्त कर किसानों को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है। इस उच्चस्तरीय बैठक में फैसला लिया गया कि मंत्रालय के सभी विभागों, प्रभागों और राष्ट्रीय मिशनों के कामकाज की अब हर महीने नियमित समीक्षा होगी और अधिकारियों के मासिक वित्तीय व भौतिक लक्ष्य तय किए जाएंगे। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

​समीक्षा बैठक में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 10.77 करोड़ से अधिक विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ बनने, दलहन व तिलहन में राष्ट्रीय लक्ष्य पार होने, प्राकृतिक खेती के अभूतपूर्व विस्तार और फसल बीमा योजना में 23 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों को रेखांकित किया गया, जिसकी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सराहना की। इसके साथ ही खेतों की मिट्टी की रक्षा और फसलों की सुरक्षा के लिए इसी महीने से शुरू होने जा रहे राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की रूपरेखा तय की गई। वहीं, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्यों को निरंतर स्वीकृतियां जारी रखने का भरोसा दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने पिछड़ रहे राज्यों और जिलों में प्रशासनिक ढिलाई दूर करने के कड़े निर्देश भी दिए।

*​इसी महीने शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, किसानों को मिले अधिकतम लाभ*

​समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिट्टी की घटती सेहत, पराली व अवशेष प्रबंधन और रासायनिक खादों के असंतुलित उपयोग से खेतों को बचाने के लिए एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान के बारे में बताया कि इसी माह 22 तारीख से पूरे देश में सघन ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जा रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस अभियान की रूपरेखा और जमीनी क्रियान्वयन इतना सुदृढ़ होना चाहिए कि इसका सीधा और अधिकतम लाभ गांव-गांव के अन्नदाताओं तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि खेतों को बचाना केवल कृषि का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य और भावी पीढ़ियों के पोषण की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक और मैदानी अमला सीधे खेतों तक पहुंचेगा, जहां किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक तत्वों के संरक्षण, पराली न जलाने और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति व्यावहारिक रूप से जागरूक किया जाएगा।

*​डिजिटल क्रांति का नया अध्याय: 10.77 करोड़ फार्मर आईडी बनकर तैयार*

​समीक्षा बैठक में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के बारे में जानकारी दी गई कि देश में कुल 14 करोड़ किसानों के डिजिटल एकीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 10.77 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल फार्मर आईडी सफलता से बनाई जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे देश के छोटे और सीमांत किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार बताया। यह विशिष्ट डिजिटल पहचान बिचौलियों के नेटवर्क को खत्म कर सीधे किसान के बैंक खाते में योजनाओं की सब्सिडी, सस्ता संस्थागत ऋण (KCC), एमएसपी खरीद, फसल बीमा और आपदा राहत पहुंचाने का पारदर्शी माध्यम बन चुकी है, जिससे कागजी औपचारिकताओं का समय समाप्त हो रहा है।

​डिजिटल ढांचे के विस्तार के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे में चालू खरीफ सीजन के दौरान अब तक 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल सर्वे पूरा हो चुका है, जिससे फसलों की सटीक जानकारी सीधे सैटेलाइट व मोबाइल ऐप से मिल रही है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत 8.03 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का डिजिटल नक्शा शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में फार्मर आईडी और डिजिटल सर्वे की रफ्तार धीमी है, वहां विशेष कैंप लगाकर सभी किसानों को तत्काल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए।

*​दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता: राष्ट्रीय लक्ष्य से आगे निकला देश*

​देश को आयात पर निर्भरता से मुक्त कराने के लिए चल रहे राष्ट्रीय मिशनों में बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में दलहन का क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता- तीनों ही राष्ट्रीय लक्ष्यों से आगे रहे। देश में 266 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 274.09 लाख टन दलहन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जबकि बुआई का रकबा 283 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य को पार कर 286.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि वर्तमान मौसमी और नीतिगत परिस्थितियां दलहन उत्पादन के लिए सर्वाधिक अनुकूल हैं, इसलिए इस अवसर को ऐतिहासिक राष्ट्रीय उपलब्धि में तब्दील किया जाना चाहिए।
​इसी तरह खाद्य तेल-तिलहन मिशन में वर्ष 2025-26 के दौरान 427 लाख टन के लक्ष्य के विरुद्ध 430.59 लाख टन तिलहन उत्पादन हुआ और बुआई क्षेत्र लक्ष्य से ऊपर 308.86 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। देश में घरेलू खाद्य तेल का उत्पादन 2023-24 के 121.75 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 129.96 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं ऑयल पाम मिशन में वर्ष 2026-27 के लिए तय 1.19 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र के लक्ष्य के मुकाबले शुरुआती महीनों में ही लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र कवर कर लिया गया है, यानी चालू वर्ष के लक्ष्य का करीब 42 प्रतिशत शुरुआती दौर में ही हासिल हो चुका है।

*​प्राकृतिक खेती, बागवानी और FPO का अभूतपूर्व विस्तार*

​राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में तय लक्ष्यों से कहीं बेहतर परिणाम मिले हैं। वर्ष 2025-26 में 18.75 लाख किसानों के लक्ष्य के मुकाबले 20.93 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई और 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया। अब तक देश भर में कुल मिलाकर 27.32 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और कुल 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया जा चुका है। इस मिशन को गांव-गांव तक ले जाने के लिए 33,257 से अधिक ‘कृषि सखियों’ और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स को तैनात किया गया है। आंध्र प्रदेश के दौरे का उदाहरण देते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि वहां कम बारिश में भी प्राकृतिक खेती से किसानों को सीधा लाभ हुआ है।

​बागवानी क्षेत्र में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत 360 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले देश में 370.84 मिलियन टन का रिकॉर्ड बागवानी उत्पादन हुआ है। इसके अंतर्गत 50 नई नर्सरियों के लक्ष्य के मुकाबले 187 नई नर्सरियां और 1 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 1.90 लाख हेक्टेयर नए बाग विकसित किए गए। वहीं 10,000 FPO योजना के तहत 2.40 लाख अतिरिक्त किसानों को जोड़ने के लक्ष्य के विरुद्ध 30.11 लाख किसान FPO से जुड़े, जिससे छोटे किसानों की बाजार तक सामूहिक पहुंच मजबूत हुई है और FPO का औसत सालाना टर्नओवर ₹38 लाख से बढ़कर ₹141.76 लाख तक पहुंच गया है।

*​PM-RKVY और एआईएफ: ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए धन की कोई कमी नहीं*

​प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि राज्यों की प्राथमिकताओं और किसानों के हितों को देखते हुए केंद्र द्वारा लगातार नई स्वीकृतियां दी जा रही हैं। वर्ष 2026-27 के लिए प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी द्वारा अब तक 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 314 प्रयोगशालाएं, गोदाम व कस्टम हायरिंग सेंटर और 303 बीज उत्पादन व रकबा विस्तार की परियोजनाएं शामिल हैं। कुल 8,550 करोड़ रु. के आवंटन में से 3,151.80 करोड़ रु. की प्रगति हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि के समग्र विकास के लिए केंद्र की ओर से धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

​उधर, कृषि अवसंरचना कोष के तहत अब तक 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए 1,01,502 करोड़ रु. से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे गांवों में 1.73 लाख करोड़ रु. से अधिक की लागत से आधुनिक वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और कस्टम हायरिंग सेंटर तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा नए एग्री-स्टार्टअप्स के लिए शुरू किए गए AgriSURE फंड के तहत 245 करोड़ रु. की वित्तीय प्रतिबद्धता जारी की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण युवाओं के नवाचार को गति मिल रही है।

*​फसल बीमा में 23% का उछाल, मृदा स्वास्थ्य और सूक्ष्म सिंचाई पर बढ़ती जागरूकता*

​प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति किसानों के बढ़ते भरोसे की पुष्टि करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि पिछले खरीफ के 2.30 करोड़ किसानों के नामांकन की तुलना में चालू खरीफ में यह आंकड़ा 23 प्रतिशत बढ़कर 2.83 करोड़ पहुंच गया है। वहीं बीमित रकबा बढ़कर 2.97 करोड़ हेक्टेयर और बीमित राशि 1.45 लाख करोड़ रु. से उछलकर 1.86 लाख करोड़ रु. के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। मंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिए कि क्लेम सेटलमेंट पूरी तरह पारदर्शी रहे, कोई भी दावा लंबित न रहे और शिकायतों का तय समय में समाधान हो।

​मृदा स्वास्थ्य योजना की समीक्षा में बताया गया कि अब तक 16 लाख से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड जनरेट किए गए हैं और पीएम-श्री स्कूलों में 1,140 मिनी टेस्टिंग लैब स्थापित हो चुकी हैं। मंत्री श्री चौहान ने संतोष जताया कि खेतों की मिट्टी की जांच और संतुलित खाद के उपयोग को लेकर किसानों में अब जागरूकता पहले से कहीं अधिक बढ़ रही है, जिसे ‘खेत बचाओ अभियान’ के साथ जोड़कर और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। वहीं ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 1,504.63 करोड़ रु. के उपयोग से 4.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को माइक्रो-इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है।

*​विस्तार तंत्र का एकीकरण: KVK, ‘आत्मा’ और विश्वविद्यालय ‘एक टीम’*

​कृषि अनुसंधान को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे किसान के खेत तक पहुंचाने के लिए विस्तार तंत्र में बड़े बदलाव के निर्देश शिवराज सिंह द्वारा दिए गए। उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (आत्मा), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और राज्य कृषि विश्वविद्यालय अलग-अलग काम करने के बजाय ‘एक टीम’ के रूप में समन्वय स्थापित करें, ताकि वैज्ञानिकों की तकनीकी सलाह सीधे किसानों तक पहुंचे और ‘लैब से लैंड’ की दूरी खत्म हो। इसके अलावा आत्मा योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री ने कहा कि पारंपरिक मेलों के ढर्रे को बदलकर किसान मेलों को अधिक उपयोगी, आधुनिक और सहभागी प्रारूप में आयोजित किया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

​विशिष्ट फसलों की समीक्षा में बताया गया कि मखाना विकास योजना के तहत किसानों को उपज का तीन गुना तक अधिक मूल्य मिल रहा है, जिसके लिए मंत्री शिवराज सिंह ने ट्रेनिंग का दायरा बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता क्रॉस-चेक करने को कहा। इसके साथ ही राष्ट्रीय बांस मिशन, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्वीकृत ‘कपास कांति’ मिशन और पूर्वोत्तर में जैविक मूल्य संवर्धन (MOVCDNER) के कार्यों में तेजी लाने पर बल दिया गया।

*​सुस्त राज्यों-जिलों को दो-टूक हिदायत: जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्रियों से सीधा संवाद*

​प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत 74 आउटपुट इंडिकेटर्स पर आधारित जिला रैंकिंग की समीक्षा की गई। देश का समग्र औसत स्कोर अप्रैल के 18.85 से सुधरकर अगस्त में 46.89 हो गया है। शीर्ष 10 जिलों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने उन जिलों पर चिंता जताई जो लगातार निचले पायदान पर बने हुए हैं या योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिल हैं। उन्होंने दो-टूक कहा कि जो जिले सुस्त रहे हैं, वहां यह स्थिति स्वीकार्य नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे जिलों को और राज्यों के कृषि मंत्रियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं मुख्यमंत्रियों से सीधी चर्चा कर गतिरोध दूर करेंगे, ताकि देश के हर हिस्से में किसानों को समान लाभ मिले।

​​समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उपस्थित सभी वरिष्ठ अधिकारियों और मिशन निदेशकों को स्पष्ट, समयबद्ध और परिणामोन्मुखी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि इसी महीने प्रारंभ हो रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ की पूरी तैयारी जमीन पर दिखाई देनी चाहिए, जिसमें वैज्ञानिक, KVK विशेषज्ञ और मैदानी अमला सीधे खेतों तक पहुंचे ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिट्टी की रक्षा, पराली प्रबंधन और उर्वरता संवर्धन की सही तकनीक व लाभ मिल सके। ​वित्तीय अनुशासन पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिया कि हर विभाग और योजना प्रभाग के लिए वित्तीय व भौतिक प्रगति की मासिक निगरानी अनिवार्य होगी तथा वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों पर निर्भरता खत्म कर निर्धारित तिमाही अनुपात के अनुसार खर्च और जमीनी काम सुनिश्चित किया जाए। इसी तरह जिन राज्यों में डिजिटल आईडी और डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य धीमा है, वहां राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर कैंप लगाए जाएं, ताकि कोई भी पात्र किसान प्रधानमंत्री के डिजिटल विजन से बाहर न रहे। ​पारदर्शिता और लीकेज पर पूर्ण रोक लगाने का कड़ा आदेश देते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि पीएम-किसान में शत-प्रतिशत पात्र किसानों को तत्काल जोड़ा जाए और किसी भी प्रकार के अपात्र लाभार्थी को सूची से बाहर किया जाए। वहीं पीएम-आशा में खरीद व्यवस्था की वास्तविक खरीद का मासिक आंकलन हो तथा निर्धारित तीन महीने की अवधि पूरी होने के बाद खरीद की समय-सीमा बार-बार आगे बढ़ाने की परिपाटी पर रोक लगाकर खरीद में लीकेज को पूरी तरह समाप्त किया जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उन्होंने किसानों के क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया पारदर्शी रखने, कोई भी दावा बेवजह लंबित न रखने और किसानों से जुड़ी शिकायतों का तय समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निस्तारण करने के निर्देश दिए।

​केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर न रहकर वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फील्ड विजिट करें और मखाना मिशन की ट्रेनिंग, प्राकृतिक खेती के मॉडल, सॉइल हेल्थ कार्ड की उपयोगिता व किसान मेलों के प्रभाव का जमीनी स्तर पर क्रॉस-चेक करें। उन्होंने ताकीद की कि जो जिले रैंकिंग में लगातार नीचे आ रहे हैं, उनके जिला प्रशासन और राज्य के कृषि सचिवों के साथ नियमित फॉलो-अप किया जाए, ताकि क्षेत्रीय विषमता समाप्त हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर खड़े छोटे एवं सीमांत किसान तक हर हाल में पहुंच सके।

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