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“सुरक्षा और शुद्धता की मिसाल: गढ़ी हसनपुर के ऐतिहासिक ‘चौदस मेले’ में आस्था का भव्य सैलाब, 25 अक्टूबर को उमड़ेगी भारी भीड़”

 

शामली। कहते हैं जहाँ आदिशक्ति माँ दुर्गा की असीम कृपा हो और मंदिर कमेटी का दृढ़ संकल्प, वहाँ व्यवस्थाएँ भी इतिहास रच देती हैं। जनपद शामली के थाना झिंझाना अंतर्गत चौसाना क्षेत्र के ऐतिहासिक गाँव गढ़ी हसनपुर में आगामी 25 अक्टूबर (दिन रविवार, शरद पूर्णिमा) को आयोजित होने वाले सुप्रसिद्ध ‘चौदस के माँ दुर्गा मेले’ की तैयारियाँ इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रही हैं। इस बार का मेला न केवल भव्य होने जा रहा है, बल्कि सुरक्षा, स्वच्छता और शुद्धता के मामले में पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल पेश करने वाला है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर कमेटी की बड़ी पहल
बीते वर्षों में, जब-जब मेले के दौरान अचानक बारिश होती थी, तब-तब खुले आसमान के नीचे बैठे दुकानदारों का सामान भीग जाता था और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को सिर छुपाने की जगह नहीं मिलती थी। माँ के भक्तों और गरीब दुकानदारों की इसी पीड़ा को देखते हुए मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सचिन चौधरी, संरक्षक सिद्धार्थ भारद्वाज, कोषाध्यक्ष नाथी राम मित्तल और सचिव संजीव कुमार ने सर्वसम्मति से एक बेहद संवेदनशील फैसला लिया। मंदिर के पूरे पिछले हिस्से को बहुत ही सुंदर और मजबूत तरीके से ढका जा रहा है, ताकि इस बार न तो आस्था भीगे और न ही दुकानदारों का हौसला टूटे।
चक्रव्यूह जैसी सुरक्षा: चप्पे-चप्पे पर रहेगी नज़र
मेले की संवेदनशीलता और भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के इतने कड़े इंतज़ाम किए गए हैं कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता:
  • सुरक्षा बल: मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ (CRPF), पीएसी (PAC) और विभिन्न थानों से भारी संख्या में महिला व पुरुष पुलिस बल तैनात रहेगा।
  • तीसरी आँख का पहरा: पूरे मेला परिसर की निगरानी के लिए कम से कम 65 सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जा रहे हैं।
  • अग्निशमन व्यवस्था: सुरक्षा के कड़े नियमों के तहत मेला परिसर में दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ियाँ मुस्तैद रहेंगी और हर एक दुकान में अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
शुद्धता का कड़ा नियम: सेहत और परंपरा से कोई समझौता नहीं
इस मेले की सबसे बड़ी और अनोखी बात यह है कि बाहर से बना हुआ कोई भी खाने-पीने का सामान मेला परिसर में लाने की सख्त मनाही है।
  • चाट, मिठाई और सभी पकवान पूरी तरह से लाइव (मेला परिसर के अंदर ही) तैयार किए जाएंगे।
  • मेले में सरसों का तेल और सूजी पूर्ण रूप से वर्जित है।
  • माँ के दरबार की मर्यादा के अनुसार अरवे और मुरमुरे का प्रसाद भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
स्वच्छता और सुविधाओं का अनोखा संगम
मेला क्षेत्र में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह शुद्ध पेयजल के लिए नल लगाए जा रहे हैं। स्वच्छता को लेकर कमेटी इस कदर गंभीर है कि रात्रि के ठीक दो बजे जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब पूरे मेला परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाया जाता है। धूल न उड़े और वातावरण स्वच्छ रहे, इसके लिए ट्रैक्टरों के माध्यम से सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाता है।
विशाल दंगल और भव्य जागरण होंगे मुख्य आकर्षण
शरद पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर जहाँ दिन में पहलवानों का दम-खम दिखाने वाला विशाल दंगल दर्शकों को रोमांचित करेगा, वहीं रात में माँ दुर्गा का विशाल जागरण आयोजित होगा, जिसमें गढ़ी हसनपुर माँ के जयकारों से गुंजायमान हो उठेगा। जगह-जगह भक्तों के लिए भंडारों की व्यवस्था की गई है।
दिन-रात एक करके पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही मंदिर कमेटी के इन भगीरथ प्रयासों की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। मंदिर परिसर और चल रहे कार्यों की कुछ विशेष झलकियां हम खास आपके लिए लेकर आए हैं। आइए, माँ दुर्गा के इस पावन उत्सव का हिस्सा बनें और इस ऐतिहासिक मेले का आनंद लें।
जय माता दी! 🙏🙏🙏🙏
सिद्धार्थ भारद्वाज प्रभारी दिल्ली एनसीआर।

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