महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों को जीवन में अपनाएं: आयुक्त आनंद स्वरूप
राष्ट्रपिता के सादगी, शांति और अहिंसा के संदेश को आत्मसात कर देशहित में कार्य करने का किया आह्वान
देहरादून, 2 अक्टूबर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप ने कैंप कार्यालय में दोनों महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, उनके संघर्षों तथा देशहित में किए गए कार्यों से अवगत कराया और उनके आदर्शों एवं सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
आयुक्त आनंद स्वरूप ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का संपूर्ण जीवन देशसेवा, त्याग, सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दोनों महान विभूतियों की जीवन गाथा एवं उनके विचारों का अध्ययन करने का आग्रह किया, ताकि उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ किया जा सके।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन दर्शन को समझने और उसका अध्ययन करने की आवश्यकता है। बापू ने सादगी, शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अपना जीवन व्यतीत किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सरलता और सादगी में ही वास्तविक
शांति निहित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी समाज और देश के हित में शांति, सद्भाव, अहिंसा एवं आपसी सहयोग की भावना अत्यंत आवश्यक है।
आयुक्त ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जीवन भी सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उनका प्रसिद्ध संदेश ‘जय जवान, जय किसान’ देश की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे गांधी और शास्त्री के आदर्शों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने कार्य एवं व्यवहार में भी उन्हें उतारें।
इस अवसर पर आयुक्त ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि देश की इन दोनों महान विभूतियों के विचार आज भी समाज और राष्ट्र के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं और इनके आदर्शों पर चलकर ही बेहतर समाज एवं सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।