विश्व शांति और सद्भाव का संदेश: राज्यपाल ने जैन आचार्य लोकेश मुनि के जन्मोत्सव पर रखे विचार

देहरादून/नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2026। 


गुरमीत सिंह ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित “विश्व शांति सद्भावना सम्मेलन” में प्रतिभाग करते हुए अहिंसा, करुणा और सहिष्णुता को मानवता के लिए अनिवार्य बताया। यह कार्यक्रम आचार्य लोकेश मुनि के जन्मोत्सव के अवसर पर अहिंसा विश्व भारती द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में गुलाब चंद कटारिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि आज वैश्विक स्तर पर अस्थिरता, पर्यावरण संकट और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियां सामने हैं, जिनका समाधान केवल नीतियों से नहीं बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक बदलाव और नैतिक मूल्यों से संभव है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सच्ची शांति का मार्ग अहिंसा, संवाद और सहिष्णुता से होकर गुजरता है।
उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह के सिद्धांतों को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि विभिन्न विचारों को समझने और स्वीकारने से ही समाज में सौहार्द स्थापित किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना विश्व को एकता और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित न मानते हुए इसे सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित विकास का प्रतीक बताया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने आचार्य लोकेश मुनि के सामाजिक योगदानों की सराहना करते हुए कहा कि वे नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, नारी सम्मान और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आचार्य को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।



