उत्तराखण्डराज्य

जल निकाय पुनरुद्धार और पुनर्भरण संरचना से भूजल सेहत सुधारने की तैयारी!

19.52 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता से 422 सतही लघु सिंचाई योजनाएं शुरू!

देहरादून 31 मार्च। केंद्रीय जल शक्ति अभियान से राज्य में 1300 पारंपरिक जल निकायों का हुआ पुनरुद्धार, 646 पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण और 15.5 हजार से अधिक के चिन्हीकरण से राज्य में भूजल की सेहत सुधारने की तैयारी। इसी तरह 19.52 हजार हेक्टेयर की अधिकतम सिंचाई क्षमता के साथ 422 सतही लघु सिंचाई योजनाएं भी शुरू की गई हैं और उत्तराखंड में 11,430 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के जलभंडारण का मानचित्र भी पूरा किया गया है।

प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र ने संसद में प्रदेश के छोटे किसानों के लिए सिंचाई परियोजनाएं से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर ये जानकारियां सामने आई हैं। जिसके ज़बाब में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि वर्ष 2015-16 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरू की गई थी। जिसका उद्देश्य था, खेतों में जल की वास्तविक पहुंच को बढ़ाना, सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, खेतों में जल उपयोग दक्षता में सुधार लाना, सतत जल संरक्षण प्रथाओं आदि को शुरू करना है। इस पीएमकेएसवाई योजना के हर खेत को पानी घटक के तहत लघु सिंचाई योजनाएं कार्यान्वित की जाती हैं। जिसमें उत्तर पूर्वी क्षेत्र के राज्यों और पहाड़ी राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड में, न्यूनतम 10 हेक्टेयर के कृषि योग्य कमान क्षेत्र वाली व्यक्तिगत सतही लघु सिंचाई योजना या 5 किमी के दायरे में न्यूनतम 20 हेक्टेयर के सीसीए वाली योजनाओं का क्लस्टर, 90 :10 के वित्तपोषण पैटर्न के तहत केंद्रीय सहायता के लिए पात्र हैं। गुल नहर लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं भी पीएमकेएसवाई -एचकेकेपी के एसएमआई घटक के अंतर्गत स्वीकार्य हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड में पीएमकेएसवाई-एचकेकेपी के अंतर्गत गुल नहर निर्माण, टैंक निर्माण और पाइपलाइन कार्यों से संबंधित कुल 422 सतही लघु सिंचाई (एसएमआई) योजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में छोटे किसानों के लिए गुल, नहर, तालाब और पाइपलाइन लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं जैसी सिंचाई योजनाएं विभिन्न राज्य क्षेत्र मदों के तहत भी कार्यान्वित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-हर खेत को पानी के अंतर्गत केंद्रीय सहायता से 19.52 हजार हेक्टेयर की अधिकतम सिंचाई क्षमता के साथ 422 सतही लघु सिंचाई योजनाएं शुरू की गई हैं।

इस मंत्रालय के अंतर्गत ही केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड भूजल प्रबंधन एवं विनियमन स्कीम के अंतर्गत राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण (नैक्यूम) कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रहा है। उत्तराखंड में 11,430 वर्ग किलोमीटर सहित देश में लगभग 25 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के जलभृत मानचित्रण का कार्य पूरा हो चुका है। कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त जल संरक्षण और पुनर्भरण उपायों सहित प्रबंधन योजनाओं के साथ जलभृत मानचित्रों को राज्यों के साथ साझा किया गया है। सीजीडब्ल्यूबी ने राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों के परामर्श से भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है जो उत्तराखंड राज्य सहित देश की विभिन्न भू-भाग स्थितियों के लिए विभिन्न संरचनाओं को दर्शाने वाली एक वृहद स्तरीय योजना है।

केंद्र ने भूजल पुनर्भरण को बढ़ाने के लिए उत्तराखंड के लिए 15,523 संरचनाओं को चिन्हित किया गया है। मास्टर प्लान को कार्यान्वयन के लिए सभी राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों को परिचालित कर दिया गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वाटरशेड विकास और पारंपरिक जल निकायों के पुनरुद्धार को बढ़ावा देने के लिए जल शक्ति अभियानः कैच द रेन और जल संचय जनभागीदारी कार्यक्रम शुरू किया है।

जल शक्ति अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड में 1,300 पारंपरिक जल निकायों का पुनरुद्धार किया गया है, 646 पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया गया है और 18,356 वाटरशेड विकास कार्य पूरे किए गए हैं। इसके अलावा, जल संचय जनभागीदारी 2.0 के अंतर्गत उत्तराखंड में 3,626 कार्य पूरे किए गए हैं।

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