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86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का लखनऊ में उद्घाटन; लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया संबोधित

सम्मेलन के सफल आयोजन हेतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिया शुभकामना संदेश

पीठासीन अधिकारी का आचरण दलगत राजनीति से हटकर पूर्णतः न्यायपूर्ण होना चाहिए, तथा न्यायपूर्ण दिखना भी चाहिए: लोक सभा अध्यक्ष

राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही के लिए एक निश्चित एवं पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है: लोक सभा अध्यक्ष

सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी: लोक सभा अध्यक्ष

नई दिल्ली/लखनऊ; 19 जनवरी, 2026: 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने किया।

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य संबोधन दिया। सम्मेलन में 28 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं तथा 6 विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी सहभागिता कर रहे हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष श्री सतीश महाना ने सम्मेलन में शामिल सभी पीठासीन अधिकारियों के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश पढ़ा।

अपने उद्बोधन में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी चाहे जिस भी राजनीतिक दल से आते हो, उनका आचरण दलगत राजनीति से हटकर पूर्णतः न्यायपूर्ण एवं निष्पक्ष होना चाहिए तथा न्यायपूर्ण व निष्पक्ष दिखना भी चाहिए।

अपने संबोधन में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं और आवाज़ शासन तक पहुँचती है, तथा उनका समाधान होता है। ऐसे में राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही का घटता समय सभी के लिए चिंताजनक है। श्री बिरला ने राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही के लिए निश्चित एवं पर्याप्त समय सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

श्री बिरला ने कहा कि आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि आज तकनीक के युग में जब चारों तरफ़ से सूचना का प्रवाह होता है, तब सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना, हम सभी की महती ज़िम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं, आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इन सम्मेलनों से देशभर में नीतियों और कल्याणकारी उपायों में सामंजस्य स्थापित करने में भी सहायता मिलती है।

श्री बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि सदन में सभी सदस्यों, विशेषकर नए और युवा सदस्यों को पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि विधानमंडल जनता की समस्याओं को उठाने का सबसे प्रभावी मंच बना रहे।

तीन दिवसीय इस सम्मेलन में आगामी दो दिन पूर्ण सत्रों में विधायी प्रक्रियाओं में तकनीक का उपयोग, विधायकों का क्षमता-निर्माण तथा जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

यह चौथी बार है जब उत्तर प्रदेश इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पूर्व राज्य में दिसंबर 1961, अक्तूबर 1985 तथा जनवरी–फरवरी 2015 में इस सम्मेलन का आयोजन किया जा चुका है।

86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन 21 जनवरी, 2026 को संपन्न होगा। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला समापन सत्र को संबोधित करेंगे। सम्मेलन के उपरांत श्री बिरला मीडिया को संबोधित करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे।

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