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उद्गार’ साहित्यिक मंच देहरादून ने किया शिक्षकों का सम्मान

देहरादून 07 सितंबर। उद्गार साहित्यिक एवं सामाजिक मंच देहरादून का 32 वाँ स्थापना दिवस समारोह दिनांक 5 सितंबर- 2026 को देहरादून के प्रतिष्ठित सभागार “हिंदी भवन” में सम्पन्न हुआ। संस्था के अध्यक्ष श्री शिवमोहन सिंह जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा श्री पवन शर्मा जी ने कुशल संचालन किया। 5 सितंबर देश में शिक्षक दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उद्गार साहित्यिक संस्था देहरादून प्रतिवर्ष अपने स्थापना दिवस पर शिक्षकों का सम्मान भी करती रही है। इस वर्ष भी दो शिक्षकों -१.डॉ॰ विद्या सिंह जी, पूर्व विभाग अध्यक्ष हिंदी एमकेपी पीजी कॉलेज देहरादून, वरिष्ठ साहित्यकार तथा २. श्री नीरज नैथानी जी सेवानिवृत्त शिक्षक एवं वरिष्ठ कवि को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्था द्वारा सम्मानित किया गया। उद्गार संस्था के अध्यक्ष श्री शिव मोहन सिंह जी, महासचिव श्री पवन शर्मा जी ने मंचासीन अतिथि श्री अनिल अग्रवाल जी, श्री असीम शुक्ल जी, श्रीमती डाॅली डबराल जी तथा उद्गार परिवार के सदस्यों श्री सत्येंद्र शर्मा तरंग, श्री संजय प्रधान, श्री आनंद सिंह राजपूत, श्री पवन कुमार सूरज, श्री अनिल शिवहरे, श्री शिवचरण शर्मा, सुश्री स्वाति मौलश्री के साथ सम्मान-पत्र, अंग-वस्त्र, श्रीफल, पुष्प माला तथा पुस्तकें भेंट कर “*उद्गार श्री*” सम्मान से सम्मानित किया।
सर्वप्रथम मंचासीन अतिथि गण द्वारा माँ शारदे की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया। पवन कुमार सूरज ने “माँ शारदे” की वन्दना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
श्री हरीश रवि जी ने उद्गार संस्था का परिचय तथा पूर्व में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। श्रीमती स्वाति मौलश्री ने सम्मानित विभूति डाॅ विद्या सिंह जी का तथा श्री आनंद सिंह आनंद ने श्री नीरज नैथानी जी का परिचय प्रस्तुत किया।
श्रीमती डाली डबराल जी ने नैतिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। श्री असीम शुक्ल जी, श्री अनिल अग्रवाल जी, श्री कृष्ण दत्त शर्मा कृष्ण जी ने शिक्षा एवं शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्गार संस्था का यह प्रयास प्रशंसनीय है।
उद्गार संस्था के अध्यक्ष श्री शिवमोहन सिंह जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में समाज एवं सभ्यता के विकास में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस समाज में शिक्षकों का सम्मान न हो उस समाज को विकसित एवं सुसंस्कृत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने दोनों सम्मानित विभूतियों, डॉ विद्या सिंह जी तथा श्री नीरज नैथानी जी, के शैक्षणिक कार्यों, रचनात्मकता तथा साहित्यिक साधना का उल्लेख किया । साथ ही शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया की भी जानकारी दी। आपने अपने उद्बोधन में कहा कि “उद्गार साहित्यिक मंच अपने स्थापना के दिन से ही साहित्य एवं समाज के उन्नयन में निरंतर प्रयासरत रहा है।”
कार्यक्रम में प्रोफेसर राम विनय सिंह जी, डॉ॰ उषा झा रेणु जी, डॉ॰ इंदु अग्रवाल जी एवं उपस्थित सभी शिक्षकों का भी माल्यार्पण,अंग वस्त्र,पुस्तक एवं लेखनी भेंट करके सम्मान किया गया।
इस अवसर पर श्री अंबर खरबंदा,श्री शिवचरण शर्मा ‘मुज्तर’, प्रोफेसर सुशील उपाध्याय, डाॅ० सोमेश्वर पाण्डेय , डाॅ० राकेश बलूनी,श्री इकबाल आजर,श्रीमती निर्मला सिंह , श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’,श्री राकेश जैन,श्री दर्द गढ़वाली,श्री चंद्र मोहन थपलियाल,श्री मदन मोहन डोभाल, श्रीमती नीरू गुप्ता’मोहिनी,श्री सतीश बंसल,श्री रुचिर सिंह,श्री मनोज पंजानी,श्री शादाब अली ‘मशहदी’,श्री रमेश चंद्र ‘राजन’,श्री अनिल कुमार अग्रवाल, श्रीमती महेश्वरी कनेरी,श्री निर्मल नैथानी,श्री सुनील नैथानी,श्रीमती शोभा पाराशर,श्री कन्हैयालाल पंत,श्रीमती संगीता वर्मानी तथा देहरादून के अनेक साहित्य मनीषी एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
उद्गार के अध्यक्ष शिव मोहन सिंह जी के नेतृत्व, उपाध्यक्ष श्री संजय प्रधान जी के मार्गदर्शन, सचिव श्री पवन शर्मा के प्रभावी संचालन, संयुक्त सचिव सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’ के संयोजन एवं श्री आनन्द सिंह ‘आनन्द’, श्री हरीश रवि तथा श्री पवन कुमार ‘सूरज’ के महत्वपूर्ण सहयोग से कार्यक्रम सुन्दर एवं भव्य हुआ।
संस्था के संयुक्त सचिव एवं सम्मान-समारोह के संयोजक सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’ द्वारा आभार उद्बोधन एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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