उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

नारी शक्ति ही संस्कार और संस्कृति की संवाहक : आर्यिका पूर्णमति माताजी

जैन धर्मशाला में भव्य नारी संस्कार सम्मेलन ‘नारी शक्ति, समाज की संस्कृति’ का आयोजन, विभिन्न महिला मंडलों ने दी प्रभावशाली प्रस्तुतियां

देहरादून 06 सितंबर । गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में परम पूज्य आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी के पावन एवं दिव्य सान्निध्य में जैन समाज की विभिन्न महिला मंडलों एवं संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में भव्य नारी संस्कार सम्मेलन ‘नारी शक्ति, समाज की संस्कृति’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नारी शक्ति, धार्मिक एवं नैतिक संस्कारों तथा समाज और संस्कृति के संरक्षण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को विभिन्न रचनात्मक, सांस्कृतिक एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कुमारी शैलजा, सांसद एवं उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रभारी, विशिष्ट अतिथि सविता कपूर, विधायक कैंट विधानसभा तथा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का जैन समाज की ओर से माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया गया।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न संस्थाओं की महिला सदस्यों एवं प्रतिभागियों ने लघु नाटिकाओं, बैनर प्रस्तुतियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदेशों को बेहद सुंदर एवं प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। प्रत्येक लघु नाटिका लगभग पांच मिनट तथा बैनर प्रस्तुति लगभग दो मिनट की रही। प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज में नारी की भूमिका, धार्मिक आस्था, संस्कारों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जीवंत रूप प्रदान किया गया।
सम्मेलन में विद्या सिंधु बालिका मंडल, जैन मिलन महिला भाग्य ज्योति, माजरा मंदिर, दिगंबर जैन समाज विकासनगर, प्रगति परिवार, जैन मिलन राजुल, एकता एवं महिला मिलन माजरा, वीरांगना मंच शिवालिक, श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर क्लेमेंटाउन, मूकमाटी परिवार, जिनवाणी जागृति मंच तथा प्रभु समर्पण समिति सहित विभिन्न संस्थाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सती सीता की अग्नि परीक्षा, सोलह सतियां, सोलह शुद्धियां, संस्कार पाठशाला, धर्म में नारी का योगदान, नारी का श्रृंगार, संस्कारी नारी का महत्व, अष्टमंगल द्रव्य, भक्तामर स्तोत्र, आठ कर्म, वीरांगना झांसी की रानी तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विविध विषयों को मंचित किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से जहां धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदेश दिए गए, वहीं सामाजिक जीवन में संस्कारों की आवश्यकता और नारी की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया गया।
सभी प्रस्तुतियां अत्यंत प्रेरणादायक, भावपूर्ण एवं अंतर्मन को स्पर्श करने वाली रहीं। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों, श्रद्धालुओं एवं जैन समाज के लोगों ने प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की और पूरे कार्यक्रम का आनंदपूर्वक लाभ लिया।
इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना तथा हिमाचल टाइम्स की संपादक एवं समाजसेवी इंद्राणी पांधी को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम में सहभागिता करने वाली विभिन्न संस्थाओं एवं महिला मंडलों का भी सम्मान कर उनके योगदान की सराहना की गई।
धर्म और संस्कार ही जीवन का आधार : आर्यिका पूर्णमति माताजी
परम पूज्य आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सम्मेलन में प्रस्तुत की गई प्रत्येक प्रस्तुति अपने आप में एक संदेश लेकर आई है। हमें इन प्रस्तुतियों से कुछ न कुछ सीख लेकर उसे अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में धार्मिक संस्कारों का होना अत्यंत आवश्यक है। संस्कारों के बिना जीवन निराधार हो जाता है और धर्म ही जीवन का वास्तविक आधार है।
उन्होंने कहा कि भौतिक वस्तुएं मनुष्य को क्षणिक आनंद प्रदान कर सकती हैं, लेकिन धर्म आत्मा को कल्याण की दिशा में ले जाता है। धर्म के माध्यम से ही मानव जीवन की नैया पार होती है और मोक्ष के मार्ग का रास्ता प्रशस्त होता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म, संस्कार और सदाचार को स्थान देना चाहिए।
आर्यिका माताजी ने कहा कि नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति और संस्कारों की प्रमुख संवाहक है। इसलिए नारी शक्ति को धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण और संस्कारों के संवर्धन के लिए निरंतर आगे आना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे आने वाली पीढ़ी को धर्म, संस्कार, सदाचार एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
नारी समाज की संस्कृति एवं संस्कारों की संवाहक
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नारी परिवार को जोड़ने के साथ-साथ समाज को संस्कार देने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों से जुड़ी नारी ही भावी पीढ़ी को सही दिशा प्रदान कर सकती है। ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम के अंत में धर्म, संस्कार एवं समाज सेवा के संकल्प के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। इस अवसर पर जैन समाज के पदाधिकारी, श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति के सदस्य, विभिन्न महिला मंडलों के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा विकासनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए श्रद्धालु मौजूद रहे।

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