देहरादून में सिल्क एक्सपो-2026 का भव्य शुभारंभ, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया उद्घाटन
रेशमी उत्पादों के व्यापार, विपणन और बाजार विस्तार का प्रभावी माध्यम है सिल्क एक्सपो: गणेश जोशी
देहरादून,

02 सितंबर। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को देहरादून के एक निजी होटल में आयोजित सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ किया। एक्सपो का आयोजन सिल्क मार्क ऑर्गेनाइजेशन, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार, रेशम निदेशालय उत्तराखण्ड एवं उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
उद्घाटन के बाद कृषि मंत्री गणेश जोशी ने एक्सपो में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और रेशमी उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रतिभागियों से उनके उत्पादों, उत्पादन प्रक्रिया और व्यवसाय से संबंधित जानकारी भी ली।
सिल्क एक्सपो-2026 में कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखण्ड सहित विभिन्न राज्यों के 25 से अधिक प्रतिभागी अपने उच्च गुणवत्ता वाले रेशमी उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय कर रहे हैं। एक्सपो में विभिन्न प्रकार के रेशमी वस्त्र और अन्य उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध हैं। इससे रेशम उत्पादकों, कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड को देश में उच्च गुणवत्ता वाले बाईवोल्टाइन सिल्क के लिए विशेष पहचान प्राप्त है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में कुल 314.6 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले बाईवोल्टाइन रेशम कोयों का उत्पादन हुआ है। वहीं, प्रदेश में रेशम कीटपालन से लगभग 10,500 कृषक परिवार जुड़े हैं, जो रेशम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि मूल्य संवर्धन से होने वाली आय में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में दून सिल्क ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उत्तराखण्ड रेशम फेडरेशन द्वारा रेशमी वस्त्रों के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं तथा उत्पादन एवं बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेशम से जुड़ी योजनाओं में स्वयं सहायता समूहों, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की भागीदारी को और मजबूत किया जाए। साथ ही युवाओं को पारंपरिक रेशम गतिविधियों के साथ आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर बाजार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि रेशम उत्पादन रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन सके।
गणेश जोशी ने कहा कि सिल्क एक्सपो केवल उत्पादों के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि रेशमी उत्पादों के व्यापार, विपणन और बाजार विस्तार का प्रभावशाली माध्यम है। ऐसे आयोजनों से किसानों, कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों को नए बाजार एवं आय के अवसर मिलते हैं। साथ ही इससे उत्तराखण्ड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
उन्होंने सिल्क एक्सपो-2026 की सफलता की कामना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड के रेशमी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और रेशम से जुड़े किसानों एवं उद्यमियों की आय बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में कैंट विधायक सविता कपूर, भाजपा नेता चौधरी अजीत सिंह, रेशम विभाग के निदेशक प्रदीप कुमार सहित विभागीय अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।