नशामुक्त उत्तराखंड के लिए जिला प्रशासन सख्त, 208 मुकदमे दर्ज, 237 अभियुक्त जेल भेजे
बिना पंजीकरण संचालित नशामुक्ति केंद्र सीज करने के आदेश, सभी केंद्रों की ऑनलाइन निगरानी के लिए बनेगा डैशबोर्ड
देहरादून, 2 सितंबर। राजधानी देहरादून में नशे के बढ़ते नेटवर्क पर अंकुश लगाने और अवैध रूप से संचालित पुनर्वास एवं नशामुक्ति केंद्रों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने, शिक्षण संस्थानों में निगरानी बढ़ाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले नशामुक्ति केंद्रों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मोथरोवाला क्षेत्र में बिना पंजीकरण संचालित नशामुक्ति केंद्र की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने तत्काल उसे सीज करने के आदेश दिए। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित पुनर्वास एवं नशामुक्ति केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के सभी नशामुक्ति केंद्रों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित किया जाए। इसके माध्यम से केंद्रों की गतिविधियों, व्यवस्थाओं और संचालन की नियमित मॉनिटरिंग एक क्लिक पर सुनिश्चित की जा सकेगी।
कॉलेजों में होगी रैंडम सैंपलिंग, छात्रों से भरवाया जाएगा ई-शपथ पत्र
जिलाधिकारी ने कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में औचक निरीक्षण करने तथा ड्रग्स के संदिग्ध मामलों की रैंडम सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी छात्रों से एंटी ड्रग्स अभियान के तहत अनिवार्य रूप से ई-शपथ पत्र भरवाने और शिक्षण संस्थानों में नियमित जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने को कहा।
उन्होंने पुलिस विभाग को पुराने अपराध आंकड़ों का जीआईएस आधारित विश्लेषण कर नशे से जुड़े संवेदनशील और हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए। इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध कार्रवाई के साथ नशे की डिमांड और सप्लाई चेन को तोड़ने पर विशेष जोर देने को कहा गया।
मेडिकल स्टोरों और संवेदनशील क्षेत्रों पर भी नजर
जिलाधिकारी ने मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरों, दवा रजिस्टर और स्टॉक रजिस्टर की नियमित जांच के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम, गांजा एवं भांग के उत्पादन और विपणन में संलिप्त लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान एवं शराब का सेवन करने वालों पर भी सख्ती के निर्देश दिए गए।
छात्रावासों, पेइंग गेस्ट आवासों, कोचिंग संस्थानों समेत अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने तथा एंटी ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया।
2026 में अब तक 208 मुकदमे, 237 अभियुक्त जेल भेजे
बैठक में पुलिस विभाग ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 208 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 237 अभियुक्तों को जेल भेजा गया है। नशे की डिमांड और सप्लाई चेन तोड़ने के उद्देश्य से प्रकाश में आए 40 अभियुक्तों के खिलाफ धारा 29 तथा चार अभियुक्तों के खिलाफ धारा 27ए के तहत कार्रवाई की गई है।
औषधि विभाग ने बताया कि जुलाई 2026 तक 58 औचक निरीक्षण किए गए। इनमें 15 संदिग्ध मामलों में ड्रग्स के नमूने लिए गए। नकली अथवा मिलावटी दवाओं के निर्माण से जुड़े चार मामलों में एफआईआर दर्ज की गई और दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में हेल्पलाइन नंबर 1933 चस्पा किया गया है।
75 बेड के राजकीय नशामुक्ति केंद्र के लिए 775.09 लाख की डीपीआर
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि राजकीय वृद्ध एवं अशक्त आवास गृह, रायवाला के समीप 0.4050 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित 75 बेड के राजकीय नशामुक्ति केंद्र के भवन निर्माण के लिए 775.09 लाख रुपये की डीपीआर शासन को भेजी गई है। इसके सापेक्ष भारत सरकार की ओर से पहली किश्त के रूप में 132 लाख रुपये निदेशालय को अवमुक्त किए जा चुके हैं।
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, ओसी क्लेक्ट्रेट रविन्द्र ज्वांठा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, उच्च शिक्षा विभाग से डॉ. दीपा मेहरा रावत, सीओ सदर अक्षित कंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूड़ी, जिला आबकारी अधिकारी वीरेंद्र कुमार जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम लाल भारती, एनजीओ आसरा से जसवीर रावत सहित अन्य सदस्य वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।