उत्तर प्रदेशसहित्य

प्रेमचंद जयंती पर डीएवी कॉलेज कानपुर में व्याख्यान, वरिष्ठ साहित्यकार शिव मोहन सिंह ने कहा—“प्रेमचंद आज के विवेक हैं”

प्रेमचंद जयंती पर डीएवी कॉलेज कानपुर में व्याख्यान आयोजित

वरिष्ठ साहित्यकार शिव मोहन सिंह बोले—प्रेमचंद इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं, बल्कि आज के विवेक हैं

कानपुर, 30 जुलाई 2026। महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर डीएवी कॉलेज, कानपुर के हिंदी विभाग द्वारा ‘वर्तमान युग में प्रेमचंद साहित्य की प्रासंगिकता’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देहरादून के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार श्री शिव मोहन सिंह मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर मनोज जोहरी ने की।
यह आयोजन डॉ. नागेंद्र स्वरूप स्मृति व्याख्यानमाला की श्रृंखला के अंतर्गत हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, अतिथियों द्वारा प्रतिमा पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजेश कुमार तिवारी ‘विरल’ ने काव्यमयी पंक्तियों के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया।
विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. यतींद्र सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य वर्ष 1906 से 1936 के बीच के लगभग तीन दशकों का महत्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक दस्तावेज है। उनके साहित्य में दहेज प्रथा, अनमेल विवाह, जातिभेद तथा स्त्री-पुरुष असमानता जैसी तत्कालीन सामाजिक समस्याओं का प्रभावी चित्रण मिलता है।
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार शिव मोहन सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य की समसामयिक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि “प्रेमचंद गतिशीलता के रचनाकार हैं। वे इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं, बल्कि आज के विवेक हैं।” उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में भी प्रेमचंद की रचनाएं मनुष्य, समाज और उसकी संवेदनाओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर मनोज जोहरी ने प्रेमचंद साहित्य से जुड़ी शैक्षणिक एवं सामाजिक मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए उनकी रचनाओं की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के शोध छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन डॉ. रश्मि सूद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रदीप कुमार ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. छाया वाजपेई, डॉ. राधा मिश्रा, डॉ. संतोष कुमार गुप्त, डॉ. राजकुमार, डॉ. विवेक कुमार सहित हिंदी विभाग के शिक्षक, स्नातक एवं परास्नातक के छात्र-छात्राएं तथा साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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