उत्तराखण्डराज्य

ऑपरेशन सिंदूर देश की वीरता और संकल्प का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

सेना के शौर्य से दुश्मन भारत की ओर आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता : मुख्यमंत्री

ऑपरेशन सिंदूर आने वाली पीढ़ियों को भी करता रहेगा प्रेरित

देहरादून 11 मई । पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून सैनिक इंस्टीट्यूट में आयोजित “ऑपरेशन सिंदूर-शौर्य, सम्मान और वीरता का एक वर्ष पूर्ण” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारतीय सेना के अदम्य साहस के कारण आतंकवाद के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
मुख्यमंत्री ने सेना के साहस, समर्पण और त्याग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना के पराक्रम के कारण दुश्मन कभी भी भारत की ओर आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रभक्ति और वीरता के लिए प्रेरित करता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पूरा देश सो रहा था, तब भारतीय सेनाओं ने मात्र 22 मिनट में पाकिस्तान में संचालित आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि देश की अत्याधुनिक वायु सुरक्षा प्रणाली ने भारत पर होने वाले हमलों को पूरी तरह विफल कर दिया और एक भी मिसाइल भारतीय भूमि पर नहीं गिरने दी। भारतीय सेनाओं ने चार दिनों के भीतर अपने शौर्य और पराक्रम से पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए विवश कर दिया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का सेना और सैनिकों से विशेष भावनात्मक संबंध है, क्योंकि राज्य के लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में सेवाएं देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना को आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों को रक्षा उपकरण और संसाधनों का निर्यात भी कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में 38 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है और आज भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि भारत के स्वदेशी हथियार किसी भी अन्य देश के हथियारों से कई गुना बेहतर हैं।
उन्होंने कहा कि यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सैनिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इनमें वन रैंक वन पेंशन योजना, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने जैसे कदम शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में पांच गुना तक की वृद्धि की है। साथ ही, पूर्व सैनिकों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सम्मान राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन की समयसीमा को भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है, जबकि पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की स्थायी संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है।
इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की उस अटल प्रतिज्ञा का प्रतीक है, जिसमें माताओं-बहनों के सम्मान, राष्ट्र की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सिन्दूर नारी सम्मान, सौभाग्य और शक्ति का प्रतीक है। ऑपरेशन सिन्दूर नाम के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत अपनी मातृशक्ति के सम्मान और सुरक्षा के लिए हर स्तर पर दृढ़ता से खड़ा है।
कार्यक्रम में सचिव सैनिक कल्याण युगल किशोर पंत, मेजर जनरल शमी सभरवाल, मेजर जनरल डी. अग्निहोत्री, मेजर जनरल पी.एस. राणा, उपनल के एमडी ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट, ब्रिगेडियर केजी बहल, सैनिक कल्याण निदेशक श्याम सिंह, मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, वाइस एडमिरल अनुराग थपलियाल सहित अनेक सैन्य अधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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