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श्रीमद् भागवत कथा में गूंजा भक्ति और विश्वास का संदेश, वृंदावन से आए मधुर कृष्ण जी ने सुनाया कथा का महत्व

देहरादून, 1 सितंबर। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री श्याम सुंदर मंदिर, पटेल नगर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन वृंदावन धाम से पधारे परम पूज्य कथा व्यास श्री मधुर कृष्ण जी महाराज के श्रीमुख से किया जा रहा है। कथा के प्रथम दिवस श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया।
प्रथम दिवस की कथा में पूज्य श्री मधुर कृष्ण जी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनुष्य को कथा बार-बार क्यों सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि भक्ति, वैराग्य और ज्ञान का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है। कथा के श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और उसे भगवान के प्रति दृढ़ विश्वास की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि सभी कथाओं का उद्गम नैमिषारण्य से माना जाता है। धार्मिक जीवन में सत्य के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सत्य का पालन करता है, वही वास्तविक अर्थों में धार्मिक है। केवल पूजा-पाठ करने से कोई व्यक्ति धार्मिक नहीं बन जाता, यदि उसके जीवन में सत्य का पालन नहीं है।
पूज्य महाराज जी ने वृंदावन धाम की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब जीवन की उलझनें स्वयं न सुलझें तो उन्हें ठाकुर जी के चरणों में छोड़ देना चाहिए। भगवान सदैव अपने भक्तों के साथ रहते हैं और उनकी हर परिस्थिति की खबर रखते हैं।
इस दौरान उन्होंने सुंदर भजन “करुणा निधान सांवरा, रखना मेरी खबर, हर पल सहारा श्याम का, मैं क्यों करूं फिकर” प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि ठाकुर जी के प्रति दृढ़ विश्वास रखने वाला व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है और विपरीत परिस्थितियों में भी उसका विश्वास नहीं डगमगाता। इसी भाव को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा—“हमें चिंता नहीं, हमारी किश्ती फंसी भंवर में, हमारी नाव का रक्षक सुदर्शन चक्रधारी है।”
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में भक्ति, वैराग्य और ज्ञान का समन्वय है। उन्होंने सनत कुमारों की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया।
कथा के दौरान पूज्य महाराज जी ने सुंदर पंजाबी भजन “तेनु रज बुलावांगे, शुद्ध बुद्ध भूल अपनी राधे-राधे गावांगे, साडा होर ठिकाना नहीं, वृंदावन छड तेरा कित्थे हो मैं जाना नहीं” प्रस्तुत किया। भजन और कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर होकर झूमते नजर आए।
श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कथा के प्रथम दिवस भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कथा का श्रवण किया और सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

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