उत्तर प्रदेशधर्म-संस्कृति

जलालाबाद में 19 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महामहोत्सव

जलालाबाद, शामली, 13 अगस्त। (राजेश सैनी)
भगवान पार्श्वनाथ की प्राचीन एवं चमत्कारिक लघु पाषाण प्रतिमा के कारण जलालाबाद उत्तर भारत के प्रमुख जैन तीर्थस्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर स्थित ऐतिहासिक कस्बे के श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में प्रतिवर्ष भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महामहोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह महोत्सव 19 अगस्त 2026, बुधवार को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
मोक्ष कल्याणक महोत्सव में उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों और आसपास के प्रदेशों से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाने सहित तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। भगवान पार्श्वनाथ की मूलनायक वेदी पर 23 किलोग्राम का विशाल लड्डू निर्वाण लाडू के रूप में अर्पित किया जाएगा।
चमत्कारिक लघु प्रतिमा है आकर्षण का केंद्र
श्री 1008 पार्श्वनाथ जैन अतिशय क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता भगवान पार्श्वनाथ की पांच इंच से भी छोटी प्राचीन लघु पाषाण प्रतिमा है। उत्तर भारत के अतिशय क्षेत्रों में जलालाबाद को ऐसा विशिष्ट क्षेत्र माना जाता है, जहां भगवान पार्श्वनाथ की इतनी लघु प्राचीन प्रतिमा विराजमान है। जैन श्रद्धालुओं में इस प्रतिमा के प्रति गहरी आस्था है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य वर्ष 1979 से प्रारंभ हुआ। वर्ष 1970 में जैन संत आचार्य विधानन्द जी महाराज के जलालाबाद आगमन के बाद क्षेत्र की प्राचीनता और अतिशयता को लेकर आसपास के जैन समाज में मंदिर के जीर्णोद्धार की भावना और मजबूत हुई। इसके बाद वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव को भी व्यापक स्वरूप मिला।
26 जून 1980 को प्रतिष्ठा के बाद भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को प्राचीन वेदी पर स्थापित कराया गया। वर्ष 1983 में आचार्य शांतिसागर जी महाराज की प्रेरणा से नवीन शिखर का निर्माण कराया गया। इसके बाद अतिशय क्षेत्र में होम्योपैथिक अस्पताल, त्यागी भवन, धर्मशाला और मानस्तंभ सहित विभिन्न निर्माण कार्य भी किए गए। राजस्थान के कुशल कारीगरों द्वारा पत्थरों पर की गई आकर्षक नक्काशी मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाती है।
सांप्रदायिक सौहार्द्र की भी मिसाल
जलालाबाद का मोक्ष कल्याणक महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एवं सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल भी पेश करता है। महोत्सव के दौरान विभिन्न समुदायों के लोग आयोजन में सहयोग करते हैं और श्रद्धालुओं के स्वागत में सहभागी बनते हैं।
अतिशय क्षेत्र कमेटी के मंत्री सुशील कुमार जैन ने बताया कि 19 अगस्त को आयोजित होने वाले निर्वाण महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
वर्तमान में भी उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन के लिए जलालाबाद पहुंचते हैं। यही धार्मिक आस्था और प्राचीन विरासत जलालाबाद को उत्तर भारत के प्रमुख जैन अतिशय क्षेत्रों में विशेष स्थान प्रदान करती है।

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