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सीमाई चुनौतियों और जनसांख्यिकीय बदलावों के प्रति सजग रहना होगा : प्रदीप

भारत की आध्यात्मिक पहचान और राष्ट्रभाव को मजबूत करना समय की आवश्यकता : प्रदीप

सीमाई चुनौतियों, जनसांख्यिकीय बदलाव और आत्मनिर्भरता पर जताई चिंता

संघ शिक्षा वर्ग ‘लघु भारत’ का सजीव स्वरूप, स्वयंसेवकों का प्रदर्शन सराहनीय : जयवीर सिंह नेगी

राष्ट्र निर्माण में सैनिकों के साथ स्वयंसेवकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका :

प्रशिक्षण से मिले संस्कार और अनुशासन समाज सेवा को देंगे नई दिशा : नेगी

देहरादून/विकासनगर, 14 जून । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख प्रदीप ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी है। देश की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे समझने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। सीमाई चुनौतियों और जनसांख्यिकीय बदलावों के प्रति सजग रहना होगा ।
रविवार को विकासनगर स्थित दि हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संघ की लगभग सौ वर्ष की यात्रा विचार, विश्वास, विकास और समाज जागरण की यात्रा रही है। स्वयंसेवक समाज में अनुशासन, एकता, संस्कार और सेवा की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के सामने बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की चुनौतियां मौजूद हैं। पाकिस्तान और चीन के साथ लगी सीमाओं की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव को चिंता का विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतें और विदेशी षड्यंत्र भारत को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके प्रति समाज को सजग रहना होगा।

प्रदीप ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। ऐसे में विज्ञान, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना समय की मांग है। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश की सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूत करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संघ किसी धर्म का विरोधी नहीं है, बल्कि समाज में राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का कार्य करता है। सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाकर ही भारत को परम वैभव की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

समारोह के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जयवीर सिंह नेगी ने कहा कि 15 दिनों के प्रशिक्षण में स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठन क्षमता और राष्ट्रसेवा की उत्कृष्ट भावना का परिचय दिया है। उन्होंने इसे ‘लघु भारत’ की झलक बताते हुए कहा कि यहां प्राप्त प्रशिक्षण स्वयंसेवकों को समाज और राष्ट्रहित में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा।
उन्होंने कहा कि देश की उन्नति और सुरक्षा में सैनिकों के साथ-साथ जागरूक नागरिकों और स्वयंसेवकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। समय और ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

वर्ग सर्वव्यवस्था प्रमुख संदीप महावर ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 30 मई से प्रारंभ हुए 15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों से कुल 306 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। इनमें 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 144 महाविद्यालयीन छात्र एवं युवा व्यवसायी तथा 40 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 162 शिक्षक, कर्मचारी, व्यवसायी और सेवानिवृत्त नागरिक शामिल रहे।

समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने दंड युद्ध, नियुद्ध, योगासन, सूर्य नमस्कार और सामूहिक समता का प्रदर्शन कर प्रशिक्षण की झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में जिला संचालक देवराज जी,वर्ग सर्वाधिकारी लोकपाल, विष्णु,वर्ग कार्यवाह रविन्द्र , चंदन , वर्ग पालक मनोहर , राकेश बडोनी , प्रान्त प्रचारक डॉ शैलेंद्र जी, सह प्रान्त प्रचार प्रमुख हेम पांडे,सह विभाग प्रचारक सौरभ, सह प्रांत प्रचारक चंद्रशेखर, प्रांत समरसता प्रमुख राजेंद्र पंत, विभाग प्रचार प्रमुख गजेंद्र खंडूरी, मुख्य शिक्षक राहुल, पूरण , सह मुख्य शिक्षक रमेश, कमल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उद्योगपति एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थित रही।

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