उत्तराखण्डकृषि खेती

दालचीनी खेती को मिलेगा वैश्विक मंच, महक कान्ति नीति से 20,800 किसानों को होगा लाभ: गणेश जोशी

देहरादून, 11 जून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी ने गुरुवार को सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (PAR&DI) में आयोजित “दालचीनी प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि दालचीनी (सिनामन) पर आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार उत्तराखण्ड की दालचीनी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महक कान्ति नीति के अंतर्गत दालचीनी की खेती को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि इस सेमिनार में श्रीलंका, इंडोनेशिया और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, एरोमा उद्योग से जुड़े उद्यमी तथा राज्य के किसान भाग ले रहे हैं। इससे किसानों को नवीन तकनीकों, उन्नत खेती और विपणन संबंधी जानकारी प्राप्त होगी तथा दालचीनी उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डे ने बताया कि महक कान्ति नीति के तहत सिनामन एवं अन्य सुगंधित फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष नीति तैयार की गई है। इसके सफल क्रियान्वयन से राज्य के सुगंधित फसल क्षेत्र का वार्षिक कारोबार 1180 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा तैयार उत्तराखण्ड महक कान्ति नीति 2026-36 के तहत नैनीताल एवं चम्पावत जनपदों में 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में दालचीनी की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लगभग 20,800 किसान लाभान्वित होंगे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में फेग्रेन्स एंड फ्लेवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, मुंबई के अध्यक्ष श्री योगेश दूबे, एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, नोएडा के अध्यक्ष श्री सुनीत गोयल तथा सुगंध व्यापार संघ, नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री रोहित सेठ उपस्थित रहे। उन्होंने काशीपुर में विकसित किए जा रहे एरोमा पार्क की प्रगति की जानकारी देते हुए उद्योगों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के विस्तार का आग्रह किया।
सेमिनार में श्रीलंका के नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के उपनिदेशक श्री चिन्धका विदाना पथिराना, प्योर सिनेमन एक्सपोर्ट्स के निदेशक श्री मुदिता जयतिलका तथा इंडोनेशिया के रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स के डॉ. सेटियारी मरवान्तो सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया, आईसीएआर, सीएसआईआर, एफएसएसएआई, डाबर इंडिया लिमिटेड, हार्पेक श्रीनगर गढ़वाल सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।
तकनीकी सत्र में श्रीलंका एवं इंडोनेशिया के विशेषज्ञों ने दालचीनी की उन्नत नर्सरी तकनीक, प्रवर्धन और विपणन मॉडल पर व्याख्यान दिए। वहीं आईसीएआर, अंडमान एवं निकोबार के विशेषज्ञ डॉ. अजित वमन ने उन्नत कृषि पद्धतियों एवं दालचीनी उत्पादन की आधुनिक तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में श्रीलंका, इंडोनेशिया तथा भारत के विभिन्न राज्यों के दालचीनी आधारित उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया।
इस अवसर पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री प्रताप सिंह गुसाईं, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की उपाध्यक्ष श्रीमती सोना सजवाण, अपर सचिव कृषि एवं कृषक कल्याण डॉ. आनंद श्रीवास्तव, विभिन्न विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज बिजल्वाण ने किया। :::

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