एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के विद्यार्थियों हेतु ‘सीमा दर्शन टूर’


*‘हर काम देश के नाम’*
अल्मोड़ा 23 मई 2026 । लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, अति विशिष्ट सेवा मेडल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, मुख्यालय उत्तर भारत क्षेत्र ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के विद्यार्थियों एवं एनसीसी कैडेट्स के लिए एक फॉरवर्ड एरिया टूर एवं फील्ड एरिया भ्रमण को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 80 यूके एनसीसी बटालियन के 20 एनसीसी कैडेट्स के लिए आयोजित यह भ्रमण युवाओं को उच्च हिमालयी सामरिक अभियानों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करेगा, साथ ही नेतृत्व क्षमता विकसित करने, भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम तथा दूरस्थ एवं अनछुए क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
पंचशूल गनर्स द्वारा आयोजित यह भ्रमण हाल ही में 119 (स्वतंत्र) इन्फैंट्री ब्रिगेड ग्रुप एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के मध्य हस्ताक्षरित एमओयू का प्रत्यक्ष परिणाम है। इस एमओयू के अंतर्गत प्रौद्योगिकी, साइबर अध्ययन, सतत विकास, जनसंचार एवं क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग एवं ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ सिविल-मिलिट्री समन्वय को सुदृढ़ करना भी शामिल है।
इस फॉरवर्ड एरिया टूर के दौरान कैडेट्स वाइब्रेंट विलेज गुंजी में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों के साथ समय बिताएंगे तथा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों जैसे काली माता मंदिर, ओम पर्वत, आदि कैलाश पर्वत एवं पार्वती कुंड झील का भी भ्रमण करेंगे।
यह पहल रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे युवा अपने मूल क्षेत्रों में पर्यटन, स्थानीय संसाधनों एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रही सरकारी योजनाओं के माध्यम से सतत अवसरों की खोज कर सकें। इसका उद्देश्य कैडेट्स को परिवर्तन के दूत के रूप में प्रेरित करना है, ताकि वे संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देते हुए सीमावर्ती गांवों के पुनर्जीवन में योगदान दे सकें।
भारतीय सेना अपने राष्ट्र निर्माण के प्रयासों के अंतर्गत युवाओं को इन क्षेत्रों की विविध संस्कृतियों एवं समुदायों से जोड़कर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रही है, साथ ही वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के महत्व को भी रेखांकित कर रही है। दूरस्थ एवं अविकसित क्षेत्रों के ग्रामीणों के साथ सार्थक संवाद के माध्यम से कैडेट्स ग्रामीण भारत की संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझेंगे तथा देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के सामरिक एवं सांस्कृतिक महत्व के प्रति जागरूक होंगे।


