शिरडी में रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन, भारत की पहली 300 किमी रॉकेट प्रणाली ‘सूर्यस्त्र’ को हरी झंडी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले – “जो राष्ट्र अपने हथियार स्वयं बनाता है, वही अपना भविष्य स्वयं लिखता है”

शिरडी/नई दिल्ली, 23 मई। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शनिवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के साथ महाराष्ट्र के शिरडी में निजी क्षेत्र की कंपनी NIBE Group के अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारत की पहली 300 किलोमीटर क्षमता वाली सार्वभौमिक रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली ‘सूर्यस्त्र’ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि जो देश अपने हथियार स्वयं बनाता है, वही अपना भविष्य तय करता है। उन्होंने कहा कि भारत को गोला-बारूद और स्वचालित रक्षा प्रणालियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में सरकार हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस नए परिसर में उन्नत तोपखाना प्रणाली, मिसाइल एवं अंतरिक्ष तकनीक, रॉकेट सिस्टम, ऊर्जावान सामग्री तथा स्वायत्त रक्षा प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान मिसाइल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला भी रखी गई। साथ ही स्वदेशी टीएनटी और आरडीएक्स संयंत्र तकनीक तथा नवीकरणीय जैव-ऊर्जा आधारित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र का अनावरण किया गया।
समारोह में उपग्रह संयोजन क्षेत्र में एनआईबीई ग्रुप और BlackSky के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी हुए।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल सेना के आकार से नहीं, बल्कि गोला-बारूद, स्वचालन और तकनीकी क्षमता से तय होंगे। उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रभावी प्रदर्शन किया है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने रक्षा उत्पादन क्षेत्र को निजी उद्योगों के लिए खोलकर नई संभावनाएं पैदा की हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) उदारीकरण, रणनीतिक साझेदारी मॉडल, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची और आईडेक्स, एडीआईटीआई तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी योजनाओं से युवा नवप्रवर्तकों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान नगण्य था, जो अब बढ़कर 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार आने वाले वर्षों में इसे 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।
उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता केवल युद्ध की आवश्यकता नहीं, बल्कि शांति, आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए भी अनिवार्य है। स्वदेशी तकनीक से संचालित ‘सूर्यस्त्र’ जैसी प्रणालियां भारत की रणनीतिक और मारक क्षमता को नई दिशा देंगी।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया पहल की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी से भारत का रक्षा तंत्र मजबूत हुआ है और देश वैश्विक शांति व स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ General Anil Chauhan, डीआरडीओ अध्यक्ष Dr. Samir V. Kamat, रक्षा उत्पादन सचिव Sanjeev Kumar सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और रक्षा क्षेत्र के हितधारक उपस्थित रहे।



