उत्तर प्रदेशखननताज़ा खबर

विशेष रिपोर्ट: मंडावर में नियमों को ठेंगा, यमुना की धार पर ‘अवैध खनन’ का काला खेल

शामली। जनपद के कैराना क्षेत्र अंतर्गत मंडावर में यमुना की जलधारा के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, वह किसी बड़ी त्रासदी को निमंत्रण दे रहा है। जिला प्रशासन की नाक के नीचे पट्टे की आड़ में अवैध खनन का कारोबार फल-फूल रहा है। भारी-भरकम पोकलैंड मशीनें दिन-रात यमुना का सीना छलनी कर रही हैं, जिससे नदी का स्वरूप पूरी तरह बिगड़ चुका है।

खौफनाक मंजर: गहरे गड्ढे और मौत का जाल

यमुना की बीच धारा से रेत निकालने के कारण नदी में असुरक्षित और बेहद गहरे गड्ढे बन गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, ये गड्ढे पूर्व में भी कई जानलेवा घटनाओं का कारण बन चुके हैं। नियम कहते हैं कि खनन एक निश्चित गहराई तक ही होना चाहिए, लेकिन यहां लालच की गहराई सारी सीमाओं को लांघ चुकी है।

रात के अंधेरे में ‘ओवरलोडिंग’ का तांडव

वैसे तो दिन में भी ओवरलोडिंग ट्रक व डंपर दिखाई देते ही हैं किन्तु जैसे-जैसे रात गहराती है, इस अवैध कारोबार की रफ्तार भी बढ़ जाती है।

समय का खेल: रात 1 से 2 बजे के बाद डंपरों और ट्रकों की संख्या में 4 से 5 गुना इजाफा हो जाता है।

गीला रेत: सड़कों पर दौड़ते डंपरों से टपकता पानी इस बात का प्रमाण है कि रेत सीधे नदी की जलधारा से निकाला जा रहा है।

खतरनाक रफ्तार: इन तेज रफ्तार डंपरों ने कई राहगीरों को अपनी चपेट में लेकर उनकी जान ले ली है, फिर भी इनकी गति पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है।

धराशायी होती सड़कें और प्रशासनिक मौन

ओवरलोड ट्रकों के कारण क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। करोड़ों की लागत से बनी सड़कें अब गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। आश्चर्य की बात यह है कि भारी वाहनों का इतना बड़ा काफिला प्रशासन की नजरों से कैसे ओझल है? ग्रामीणों का आरोप है कि सड़कों की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि चलना भी मुश्किल है ऊपर से इनकी तेज गति से धूल इतनी ज्यादा उड़ती है की सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। धूल के कारण गंभीर बिमारी होने का भी डर सता रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

क्या कहती है सरकारी गाइडलाइन? (नियमों का उल्लंघन)

खनन मंत्रालय और एनजीटी (NGT) के स्पष्ट निर्देश हैं जिनका यहाँ खुलेआम उल्लंघन हो रहा है:-

नियम वर्तमान स्थिति

मशीनों का प्रयोग: जलधारा के अंदर मशीनों (पोकलैंड) का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन: बड़ी मशीनों से नदी के बीच से रेत निकाला जा रहा है।

समय सीमा: खनन का कार्य सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही किया जा सकता है। उल्लंघन: रात 1 – 2 बजे से सुबह तक सबसे अधिक सक्रियता रहती है।

गहराई की सीमा: रेत निकासी के लिए एक निश्चित गहराई (आमतौर पर 3 मीटर) तय होती है। उल्लंघन: गहरे कुएं नुमा गड्ढे बनाए जा रहे हैं।

परिवहन नियम: ट्रकों पर तिरपाल होना अनिवार्य है और ओवरलोडिंग प्रतिबंधित है।  उल्लंघन: गीला रेत खुलेआम ओवरलोड होकर सड़कों पर बह रहा है।

निष्कर्ष: यदि समय रहते जिला प्रशासन ने इन ‘रेत माफियाओं’ पर शिकंजा नहीं कसा, तो यमुना का पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) पूरी तरह तबाह हो जाएगा और स्थानीय जनता को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

प्रशासन से सवाल: क्या मंडावर में हो रहा यह अवैध खेल अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है या प्रशासन वाकई इतना लाचार है ?

रिपोर्ट : सिद्धार्थ भारद्वाज प्रभारी दिल्ली एनसीआर।

 

Related Articles

Back to top button