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गर्दन की जानलेवा चोट पर दून मेडिकल कॉलेज की बड़ी जीत

जटिल सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी से 30 वर्षीय युवक फिर चला अपने पैरों पर

देहरादून,11 फरवरी 2026। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ने उन्नत चिकित्सा क्षमताओं का परिचय देते हुए एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अब प्रदेश में भी जटिल से जटिल स्पाइन सर्जरी संभव है। कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग की स्पाइन सर्जरी टीम ने गर्दन की अत्यंत खतरनाक चोट से जूझ रहे एक युवक का सफल ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दी है।
उत्तरकाशी जनपद के चिन्यालीसौड़ निवासी 30 वर्षीय नरेश राणा लकड़ी काटने के दौरान पेड़ से गिर गए थे, जिससे उनकी गर्दन के पिछले हिस्से में गंभीर चोट आई। परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया, जहां वे असहनीय दर्द और गर्दन हिलाने में पूर्ण असमर्थता की स्थिति में थे।
एमआरआई एवं सीटी स्कैन जांच में चिकित्सकों ने पाया कि मरीज को अस्थिर C2 ओडोन्टॉइड फ्रैक्चर हुआ है। यह ऊपरी सर्वाइकल स्पाइन की अत्यंत संवेदनशील और जानलेवा चोट मानी जाती है, जिसमें जरा-सी देरी स्थायी लकवे या मृत्यु तक का कारण बन सकती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक स्पाइन टीम ने तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया और मरीज की C2 ओडोन्टॉइड एंटीरियर फिक्सेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की। यह आधुनिक, न्यूनतम इनवेसिव एवं नॉन-फ्यूजन तकनीक है, जिससे फ्रैक्चर को स्थिर करने के साथ-साथ गर्दन की प्राकृतिक गतिशीलता—दाएं-बाएं घूमने एवं ऊपर-नीचे झुकने की क्षमता—भी सुरक्षित रहती है।
मानक ऑपरेटिव प्रोटोकॉल एवं इंट्रा-ऑपरेटिव इमेजिंग गाइडेंस के तहत संपन्न इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वे बिना किसी सहारे चल-फिर रहे हैं, दैनिक कार्य स्वयं कर पा रहे हैं तथा ओपीडी में नियमित फॉलो-अप पर हैं।
इस अवसर पर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने सफल सर्जरी पर डॉ. विक्रांत एवं उनकी पूरी स्पाइन सर्जरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान में उपलब्ध आधुनिक तकनीक, उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं और चिकित्सकों की विशेषज्ञता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उन्होंने यह भी कहा कि दून मेडिकल कॉलेज लगातार जटिल सर्जरी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, जिससे अब राज्य के मरीजों को इलाज के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
समय पर उपचार, अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम—इन तीनों के समन्वय ने एक संभावित त्रासदी को सफलता की प्रेरक कहानी में बदल दिया है।

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