पशु रोगों के त्वरित निदान के लिए फार्मेसी अधिकारियों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

देहरादून,13 मार्च 2026।
पशुओं में होने वाली बीमारियों के त्वरित और सटीक निदान के लिए नई प्रयोगशाला तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून द्वारा पशुपालन विभाग के फार्मेसी अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। “Laboratory Techniques for Disease Diagnosis and Outbreak Management” विषय पर आधारित यह प्रशिक्षण 9 मार्च से 13 मार्च 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें पशुपालन विभाग में कार्यरत 30 फार्मेसी अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ निदेशक, पशुपालन विभाग डॉ. उदय शंकर, अपर निदेशक (गढ़वाल मंडल) डॉ. भूपेन्द्र सिंह जगपागी तथा उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. सतीश जोशी ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के उद्देश्यों और विषयवस्तु के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आलोक खण्डूरी, पशुचिकित्सा अधिकारी, गढ़वाल मंडलीय प्रयोगशाला, पौड़ी तथा डॉ. प्रीति पंत, वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी, रोग निदान प्रयोगशाला पशुलोक, ऋषिकेश ने पशुओं में होने वाली बीमारियों के त्वरित निदान के लिए नवीनतम प्रयोगशाला तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी।
उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार डॉ. प्रलयकर नाथ ने बताया कि पशुपालन विभाग के फार्मेसी अधिकारियों के कौशल विकास के लिए परिषद और विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं, जिससे पशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।
निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. उदय शंकर ने प्रतिभागी अधिकारियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। वहीं परिषद के अध्यक्ष डॉ. कैलाश उनियाल ने ग्रामीण और गॉडल पशुचिकित्सालयों में पशु रोगों के निदान के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण की महत्ता पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान परिषद के उप रजिस्ट्रार डॉ. उदय शंकर गुप्ता भी उपस्थित रहे।


