उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

षोडश संस्कार प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ, नैतिक व सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया जोर

देहरादून 11 मार्च। उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम्, हरिद्वार द्वारा आयोजित “षोडश संस्कार : प्रयोगात्मक प्रशिक्षण कार्यशाला” का शुभारंभ जैन धर्मशाला, प्रिंस चौक में वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और आम जनमानस को जीवन में अच्छे संस्कारों के महत्व से अवगत कराना तथा उन्हें व्यवहारिक रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार बिष्ट ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं और एक सशक्त समाज की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का विकास भी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न प्रयोगात्मक गतिविधियों, संवाद, समूह चर्चा और अभ्यासों के माध्यम से बताया गया कि दैनिक जीवन में छोटे-छोटे व्यवहार से भी उत्तम संस्कार विकसित किए जा सकते हैं। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अनेक प्रश्न पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए।
इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना तथा मुख्य वक्ता डॉ. मोहन लाल जोशी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रो. मनोज किशोर पंत, कार्यक्रम संयोजक सुभाष जोशी, मनोज शर्मा, संस्कृत शिक्षा परीक्षा परिषद के सचिव पद्माकर मिश्र, डॉ. रामभूषण बिजल्वाण, डॉ. शैलेंद्र डंगवाल, डॉ. सीमा बिजल्वाण, गौरव, डॉ. नवीन सिंघल, किशोरी लाल रतूड़ी, अनूप बहुखंडी, डॉ. दीपशिखा, कविता मैठाणी, श्री महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा, विनय प्रजापति, गौरव जैन, बालकृष्ण शर्मा, संजीव गुप्ता सहित अनेक प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
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