क्षमावाणी पर्व पर गूंजा ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’, श्रद्धालुओं ने मांगी एक-दूसरे से क्षमा
जलालाबाद (शामली) 26 सितम्बर ।
श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के समापन के पश्चात क्षमावाणी पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं आत्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हुए ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहा और मन, वचन एवं कर्म से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए परस्पर क्षमा मांगी।
क्षमावाणी पर्व जैन धर्म में क्षमा, आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आपसी सद्भाव का विशेष पर्व माना जाता है। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर अपने मन से कटुता, वैमनस्य और द्वेष को दूर कर प्रेम, मैत्री, भाईचारे एवं परस्पर सम्मान की भावना के साथ जीवन आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने कहा कि क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की निर्मलता और संबंधों में मधुरता का संदेश देती है।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को क्षमावाणी पर्व की शुभकामनाएं दीं तथा सभी जीवों के प्रति मैत्री एवं करुणा का भाव रखने का संकल्प लिया। वातावरण धार्मिक एवं आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा।
इस अवसर पर ममता जैन, प्रिया जैन, हरवंश जैन, दीपक जैन (सहारनपुर), अंकित गोयल, अशोक अग्रवाल, अनुराग जैन (शामली), हिमांशु, राहुल जैन, निपुन जैन, नेहा जैन, दर्श जैन, उमा जैन (ऑस्ट्रेलिया), मनीष जैन, भूपेंद्र जैन, गौरव जैन (दिल्ली), वैभव जैन, वंश जैन (सरधना), सुशील जैन, ऋषभ जैन, सनत जैन, सतीश जैन, राहुल जैन एवं अर्पण जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
