दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना, मंदिर में गूंजे भक्ताम्बर स्तोत्र के 48 श्लोक

जलालाबाद (शामली)19 सितम्बर 
। श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म की विधि-विधानपूर्वक आराधना की। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजन, धार्मिक अनुष्ठान एवं भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना कर उत्तम शौच धर्म के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
धार्मिक दृष्टि से उत्तम शौच धर्म मनुष्य को लोभ, तृष्णा और सांसारिक आसक्तियों का त्याग कर संतोष, पवित्रता एवं आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। श्रद्धालुओं ने कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मचिंतन एवं आत्मशुद्धि का पर्व है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने जीवन में धर्म और सदाचार को अपनाने का प्रयास करता है।
इस अवसर पर सुशील जैन, ऋषभ जैन, सतीश जैन, राहुल जैन, राज जैन, काजल जैन, रेखा जैन, सविता जैन, सुष्मा जैन, चेरी जैन, अनिल जैन, अर्पित जैन, हिमांशु, पारस जैन, विकास जैन, राजीव जैन, ममता जैन एवं साक्षी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की।
दशलक्षण महापर्व के सभी दस दिनों में मंदिर में प्रतिदिन शाम के समय भक्ताम्बर स्तोत्र के 48 श्लोकों का सामूहिक पाठ श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है। पाठ एवं पूजन के दौरान मंदिर परिसर भगवान जिनेंद्र देव के जयकारों और भक्ति भाव से गूंज उठा। पूरे दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रहा।