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कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में राष्ट्रीय मिशन ऑन लाइब्रेरीज का क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू

राष्ट्रीय मिशन ऑन लाइब्रेरीज के अंतर्गत सार्वजनिक पुस्तकालय कर्मियों के लिए 58वां क्षमता निर्माण कार्यक्रम कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में शुरू

कार्यक्रम में कोहा के माध्यम से पुस्तकालय स्वचालन, एआई एवं आईसीटी उपकरणों, दिव्यांगजन के लिए सेवाओं तथा पुस्तकालय संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण पर जोर

-अब तक आयोजित 57 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से 2,600 से अधिक पुस्तकालय पेशेवरों को प्रशिक्षित किया गया

-उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से लगभग 80 पुस्तकालय पेशेवर पांच दिवसीय कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं

नैनीताल 23 अगस्त। राष्ट्रीय मिशन ऑन लाइब्रेरीज (एनएमएल),संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत सार्वजनिक पुस्तकालय कर्मियों के लिए 58वां क्षमता निर्माण कार्यक्रम 22 अगस्त, 2026 को कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के सहयोग से शुरू हुआ। यह कार्यक्रम 26 अगस्त, 2026 तक चलेगा।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय मिशन ऑन लाइब्रेरीज के एफए श्री दीपांजन चटर्जी ने कहा कि वर्ष 2014 में स्थापित एनएमएल मॉडल पुस्तकालयों, सार्वजनिक पुस्तकालयों के सर्वेक्षण, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय वर्चुअल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से सार्वजनिक पुस्तकालय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों के विकास के लिए इन पहलों के क्रियान्वयन में राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

श्री चटर्जी ने बताया कि अब तक ऐसे 57 कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से 2,600 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्यक्रम में कोहा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कोहा एक निःशुल्क और ओपन-सोर्स पुस्तकालय स्वचालन सॉफ्टवेयर है, जिसका उपयोग कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय सहित कई संस्थानों द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में दिव्यांगजन के लिए सेवाओं में सुधार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आईसीटी उपकरणों के उपयोग तथा पुस्तक बंधाई पर भी सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने पुस्तक बंधाई को “लुप्त होती कला, लेकिन पुस्तकालय संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण के लिए आवश्यक” बताया।

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वित्त पोषण के संबंध में श्री चटर्जी ने बताया कि सातवीं अनुसूची के तहत पुस्तकालय राज्य का विषय है। इसलिए केंद्र से सहायता राज्य पुस्तकालय योजना समिति की सिफारिश पर 75:25 के केंद्र-राज्य अनुपात में जारी की जाती है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के लिए अल्मोड़ा स्थित राज्य केंद्रीय पुस्तकालय हेतु ₹188.77 लाख और जिला पुस्तकालय, नई टिहरी के लिए ₹86.20 लाख स्वीकृत किए गए हैं।
डीएसबी, कुमाऊं विश्वविद्यालय की कैंपस निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा ने सार्वजनिक पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये पुस्तकालय अब सीखने, सामुदायिक सहभागिता और आजीवन शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा डिजिटल युग में नागरिकों को प्रमाणिक एवं विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सैनिक स्कूल, नैनीताल के प्रधानाचार्य श्री बी. एस. मेहरा ने कहा कि विद्यालय स्तर पर पढ़ने की आदत विकसित करना आवश्यक है, क्योंकि इससे बच्चों की भाषा, शब्दावली, कल्पनाशक्ति, एकाग्रता और आलोचनात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से पढ़ने से समझने की क्षमता बेहतर होती है और विद्यार्थियों को अपनी पाठ्यपुस्तकों तथा अन्य विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सहायता मिलती है।

कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय से प्रो. नीलू लोढ़ियाल, डॉ. चारु तिवारी, डॉ. आर. के. विश्वकर्मा, डॉ. अशोक कुमार और डॉ. संतोष कुमार तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग से प्रो. एम. मासूम राजा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. युगल जोशी ने गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) से लगभग 80 पुस्तकालय पेशेवर पांच दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

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