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लोक संवर्धन पर्व के तीसरे दिन भी भारत की समृद्ध शिल्पकला ने खींची भीड़

– राष्ट्रीय शोक के मद्देनजर सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे स्थगित, प्रदर्शनी एवं फूड कोर्ट में दिनभर रही आगंतुकों की भीड़।

– 150 से अधिक स्टॉलों पर देशभर के हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद एवं पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन।

– निस्बड के क्षमता निर्माण सत्र में कारीगरों एवं उद्यमियों ने लिया भाग।

देहरादून 13 जुलाई। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा उत्तराखण्ड सरकार के उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के सहयोग से परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व के तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में आगंतुकों ने महोत्सव में भाग लिया। भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं और पारंपरिक कारीगरी को समर्पित यह महोत्सव देशभर के हस्तनिर्मित उत्पादों, क्षेत्रीय कलाओं एवं स्थानीय उद्यमिता का प्रमुख आकर्षण बना रहा।

कतर के पूर्व अमीर महामहिम शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार द्वारा 13 जुलाई 2026 को घोषित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोक के सम्मान में दिनभर के सभी निर्धारित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं मनोरंजन प्रस्तुतियां स्थगित रखी गईं। इसके बावजूद प्रदर्शनी एवं फूड कोर्ट में आगंतुकों की निरंतर आवाजाही बनी रही तथा लोगों ने विभिन्न राज्यों के पारंपरिक उत्पादों एवं हस्तशिल्प की खरीदारी की।

महोत्सव में 150 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉलों पर देशभर के हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, पारंपरिक कलाकृतियां एवं विविध शिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखण्ड के कारीगरों के लिए समर्पित हैं, जबकि शेष स्टॉल विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की समृद्ध कला एवं शिल्प परंपराओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उत्तराखण्ड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, कर्नाटक, गुजरात, लद्दाख, महाराष्ट्र, असम, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश एवं गोवा के कारीगर इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं।

आगंतुकों को हैंड ब्लॉक प्रिंट, कढ़ाई एवं क्रोशिया उत्पाद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, लकड़ी की कलाकृतियां एवं फर्नीचर, हस्तकढ़ाई वाले वस्त्र, धातु शिल्प, हथकरघा वस्त्र, पर्यावरण-अनुकूल गृह सज्जा सामग्री, रेजिन क्राफ्ट, पीतल उत्पाद, इत्र एवं सुगंधित उत्पाद, पारंपरिक चूड़ियां, चन्नपटना के खिलौने, कोटा डोरिया वस्त्र, जरी कार्य, चमड़े के उत्पाद, अजरख हैंड ब्लॉक प्रिंट, ऐपण कला तथा खादी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला एक ही स्थान पर देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है।

कारीगरों एवं उद्यमियों की क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निस्बड) द्वारा एक संवादात्मक ज्ञान एवं क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, व्यवसाय विस्तार तथा बाजार से जुड़ाव से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के एक प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शोक के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित रखे गए हैं, लेकिन लोक संवर्धन पर्व की वास्तविक भावना देश के कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्पकला और पारंपरिक विरासत में निहित है। उन्होंने कहा कि आगंतुकों का उत्साह कारीगरों के लिए प्रोत्साहन का स्रोत है तथा प्रत्येक खरीदारी उनके आर्थिक सशक्तिकरण और पारंपरिक आजीविका को मजबूती प्रदान करती है।

महोत्सव के फूड कोर्ट में उत्तराखण्ड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों के लोकप्रिय व्यंजन भी उपलब्ध हैं, जिससे यह आयोजन परिवारों एवं पर्यटकों के लिए एक संपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव प्रदान कर रहा है।

लोक संवर्धन पर्व 15 जुलाई 2026 तक परेड ग्राउंड, देहरादून में प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। महोत्सव में प्रवेश सभी आगंतुकों के लिए निःशुल्क है। 14 जुलाई 2026 से सांस्कृतिक कार्यक्रम पुनः प्रारंभ होंगे, जिनमें उत्तराखण्ड के लोकप्रिय लोक बैंड पांडवास सहित प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

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