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भानियावाला–जॉलीग्रांट फोर/सिक्स लेन परियोजना पर NHAI का स्पष्टीकरण, कहा– पर्यावरण संरक्षण को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता

देहरादून 10 जुलाई । भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित दावों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्पष्टिकरण जारी किया है। एनएचएआई ने कहा है कि परियोजना में आधुनिक सड़क अवसंरचना के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है तथा उच्च न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन के आरोप पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून सौरभ सिंह ने बताया कि परियोजना की इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करते समय सड़क क्षमता बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। वन क्षेत्र में राइट ऑफ वे (ROW) को 60 मीटर से घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया है, ताकि अतिरिक्त वन भूमि प्रभावित न हो।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के तकनीकी परामर्श से हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास (करीब 3.5 किलोमीटर एलिवेटेड संरचना), छह बॉक्स कल्वर्ट तथा 13 पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएं भी परियोजना में शामिल की गई हैं।
एनएचएआई के अनुसार प्रतिपूरक वनीकरण और उसके अगले दस वर्षों के रखरखाव के लिए 1.97 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई है। साथ ही राज्य सरकार द्वारा 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की गई है, जिससे नए वन विकसित किए जा सकें। वन्यजीव राहत योजना तथा मिट्टी एवं जल संरक्षण योजना के लिए भी 6.04 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई है।
परियोजना से प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 वृक्षों का फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रत्यारोपण किया जाएगा, जबकि शेष वृक्षों का नियमानुसार प्रबंधन किया जाएगा।
सौरभ सिंह ने कहा कि कुछ समाचारों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया गया है कि एनएचएआई और वन विभाग उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध वृक्षों की कटाई कर रहे हैं, जबकि यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उन्होंने बताया कि इस मामले में दायर अवमानना याचिका को भी उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था, जिससे स्पष्ट है कि परियोजना का कार्य सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों तथा न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का उदाहरण है। एनएचएआई भविष्य में भी सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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