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एलयूसीसी चिटफंड घोटाला: सीबीआई ने 18 आरोपियों व संस्था के खिलाफ दाखिल किया आरोप-पत्र, 400 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप

देहरादून,10 जुलाई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून स्थित बीयूडीएस अधिनियम के विशेष न्यायालय में 18 आरोपियों और संस्था के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), उत्तराखंड जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम तथा अनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी (बीयूडीएस) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
सीबीआई के अनुसार आरोप-पत्र में मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट तथा एलयूसीसी संस्था को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई ने बताया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वर्ष 2025 के आदेश के बाद 26 नवंबर 2025 को इस घोटाले से जुड़ी राज्यभर की 18 एफआईआर अपने हाथ में लेकर जांच शुरू की गई थी।
एक लाख से अधिक निवेशक बने शिकार
जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से उत्तराखंड में एलयूसीसी की 50 से अधिक शाखाओं के माध्यम से अवैध जमा योजनाएं संचालित की गईं। लगभग एक लाख से अधिक निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये जमा कराए गए। कुछ निवेशकों को आंशिक भुगतान किया गया, लेकिन कुल 400 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है।
सीबीआई के अनुसार एलयूसीसी का कोई वास्तविक व्यवसाय या आय का स्रोत नहीं था। पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से प्राप्त धन से किया जाता था, जिससे यह एक पोंजी स्कीम साबित हुई।
समीर अग्रवाल मास्टरमाइंड, विदेश फरार
जांच एजेंसी का कहना है कि मुंबई निवासी समीर अग्रवाल पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। उसने एलयूसीसी का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर अनियमित जमा योजनाओं का संचालन किया और जमाकर्ताओं के धन के गबन के लिए कथित रूप से 10 शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए। सीबीआई के अनुसार समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश फरार हैं। उन्हें वापस लाने के लिए नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए हैं।
10 शेल कंपनियों के जरिए धन की हेराफेरी
जांच में पता चला कि किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन और सुशील कुमार गोखरू की मदद से मुंबई में 10 शेल कंपनियों के खाते खोले गए। उत्तराखंड के निवेशकों से जुटाई गई रकम इन खातों में ट्रांसफर कर बाद में सैकड़ों बैंक खातों के जरिए विभिन्न लेनदेन के माध्यम से डायवर्ट की गई।
39 संपत्तियां चिन्हित, 29 कुर्क
सीबीआई ने आरोपियों की उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित 39 संपत्तियों की पहचान की है। इनमें से 29 संपत्तियों पर अनंतिम कुर्की आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष 10 संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया जारी है।
सात आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान सीबीआई ने तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

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