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राज्यपाल गुरमीत सिंह और कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया 120वें अखिल भारतीय किसान मेले का शुभारंभ

पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेले का भव्य शुभारंभ

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा—‘फूड सरप्लस’ के बाद अब ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में बढ़े कृषि विश्वविद्यालय

पंतनगर/देहरादून, 03 अक्टूबर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में शनिवार को 120वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने किया। इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, निदेशक शोध डॉ. एस.के. वर्मा तथा निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा सहित बड़ी संख्या में किसान, वैज्ञानिक, विद्यार्थी, उद्यमी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
उद्घाटन के बाद कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने राज्यपाल एवं कृषि मंत्री को विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों, नवाचार आधारित स्टॉलों तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए उत्पादों के स्टॉलों का अवलोकन कराया। मेले में कृषि यंत्रों, जैविक उत्पादों, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, पुष्प एवं सब्जियों की नवीन प्रजातियों, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली और स्मार्ट कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया गया है।
कृषि में तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को खेत तक पहुंचाने पर जोर
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि 21वीं सदी की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को किसानों के खेत तक पहुंचाना आवश्यक है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को कभी जंगलों और वन्यजीवों से कृषि क्षेत्र में परिवर्तित किया गया, उसमें किसानों और पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल ने कहा कि 120वें किसान मेले के पीछे 119 आयोजनों का अनुभव और समृद्ध परंपरा जुड़ी हुई है। यह मेला वैज्ञानिकों, किसानों, युवाओं, उद्यमियों और नई तकनीक को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में ‘फूड सरप्लस’ के बाद ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में आगे बढ़े।
हनी, अरोमा और श्रीअन्न क्रांति पर दिया जोर
राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हनी क्रांति, अरोमा क्रांति और श्रीअन्न यानी मिलेट्स क्रांति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक शहद, सुगंधित एवं औषधीय फसलों तथा मिलेट्स के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि किसानों को तकनीक से दूरी बनाने के बजाय उसके साथ मित्रता करनी होगी। ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को मजबूत करते हुए वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर किसान के खेत तक पहुंचाना होगा। कृषि विज्ञान केंद्रों को स्थानीय कृषि समस्याओं के समाधान का केंद्र बनाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान को प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने पर भी उन्होंने जोर दिया।
उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार की समझ जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक किसान की भूमिका केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। किसानों को पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, बाजार, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की जानकारी भी हासिल करनी होगी। उन्होंने उत्तराखंड की महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और ड्रोन तकनीक के उपयोग की सराहना की।
उन्होंने कहा कि खेत में नवाचार, किसान के हाथ में तकनीक, स्थानीय उत्पादों को बाजार और गांवों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उत्तराखंड और भारत के विकास की राह खेतों से होकर गुजरती है। किसानों, वैज्ञानिकों, युवाओं और उद्यमियों को मिलकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में काम करना होगा।
कृषि अनुसंधान का लाभ खेत तक पहुंचे : गणेश जोशी
कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब वैज्ञानिक तकनीक और शोध किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने ‘लैब टू लैंड’ की भावना को मजबूत करने तथा कृषि वैज्ञानिकों के किसानों के साथ नियमित संवाद पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बागवानी, हाई डेंसिटी एप्पल, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और मोटे अनाज जैसी फसलों की व्यापक संभावनाएं हैं। कोदा-झंगोरा जैसे पारंपरिक अनाजों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसानों के लिए नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
560 से अधिक स्टॉल, 40 से 50 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना
कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान तभी सार्थक है, जब विकसित तकनीक और उसके परिणाम किसानों के खेत तक पहुंचें तथा उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिले।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा ने बताया कि मेले में 560 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं तथा इस वर्ष 40 से 50 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना है। स्टॉलों पर कृषि यंत्र, जैविक उत्पाद, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, पुष्प एवं सब्जियों की नवीन प्रजातियां, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली और स्मार्ट कृषि उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों ने जैम, जेली, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, बड़ियां और हस्तशिल्प सामग्री भी प्रदर्शित की है।
कार्यक्रम के दौरान मंचासीन अतिथियों द्वारा विभिन्न कृषि साहित्य का विमोचन किया गया। साथ ही उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से चयनित नौ प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। अंत में निदेशक शोध डॉ. एस.के. वर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में वीसीएसजी उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, जिला प्रशासन के अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अधिष्ठाता, निदेशकगण, संकाय सदस्य, किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी तथा विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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