मंच शुद्धिकरण मामले में बीजेपी-कांग्रेस पर बरसीं आप प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया
कहा—जनमुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक रोटियां सेक रही हैं दोनों पार्टियां
देहरादून 8 सितम्बर 2026 । आम आदमी पार्टी उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया* ने मंच शुद्धिकरण के मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता आज महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे गंभीर जनमुद्दों से जूझ रही है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस इन वास्तविक समस्याओं पर जवाब देने के बजाय गैरजरूरी मुद्दों को हवा देकर राजनीति करने में जुटी हैं।
*उमा गौड़ सिसोदिया* ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मंच शुद्धिकरण जैसे मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर भाजपा और कांग्रेस जनता का ध्यान असली सवालों से भटकाने का प्रयास कर रही हैं। दोनों दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार कब मिलेगा, पहाड़ों से पलायन कब रुकेगा, सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति कब सुधरेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी।
*उन्होंने* कहा कि उत्तराखंड की जनता भावनात्मक और विवादित मुद्दों की राजनीति से आगे बढ़ चुकी है। जनता अब अपने परिवार और प्रदेश के भविष्य को लेकर ठोस जवाब चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस के पास जब जनहित के सवालों का जवाब नहीं होता, तब वे ऐसे मुद्दों को उछालकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं।
*आप प्रदेश अध्यक्षा* ने कहा कि आम आदमी पार्टी जनता के वास्तविक मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश की राजनीति को आरोप-प्रत्यारोप और दिखावे से निकालकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, पानी, सड़क, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर केंद्रित करना है।
उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि यदि दोनों दल वास्तव में उत्तराखंड की जनता के हितैषी हैं तो उन्हें मंच शुद्धिकरण जैसे विवादों में उलझने के बजाय जनता के बीच जाकर अपने काम का हिसाब देना चाहिए।
*उमा गौड़ सिसोदिया* ने कहा कि आने वाले समय में आम आदमी पार्टी प्रदेश के हर वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाएगी और जनता को गुमराह करने वाली राजनीति के खिलाफ लगातार संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब मुद्दों की राजनीति चाहती है, न कि मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली राजनीति।