यूरोपियन हाइपरलूप वीक-2026 में एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की टीम वेगापॉड का शानदार प्रदर्शन, दुनिया में 7वां स्थान
‘इमर्जिंग इंजीनियरिंग टैलेंट’ पुरस्कार से सम्मानित, इंजीनियरिंग डिजाइन श्रेणी में छठा स्थान हासिल कर भारत का बढ़ाया गौरव
देहरादून 12 अगस्त ।
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) की आधिकारिक हाइपरलूप टीम वेगापॉड हाइपरलूप ने नीदरलैंड के ग्रोनिंगन स्थित यूरोपियन हाइपरलूप सेंटर में आयोजित यूरोपियन हाइपरलूप वीक (EHW)-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। टीम ने दुनिया की शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थाओं के बीच सातवां स्थान हासिल करने के साथ ही इंजीनियरिंग डिजाइन श्रेणी में छठा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा टीम को प्रतिष्ठित ‘इमर्जिंग इंजीनियरिंग टैलेंट’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
यूरोपियन हाइपरलूप वीक दुनिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय छात्र इंजीनियरिंग प्रतियोगिताओं में शामिल है। इसमें यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरिका और मध्य पूर्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों की टीमें हाइपरलूप तकनीक में अपने शोध, डिजाइन और प्रोटोटाइप का प्रदर्शन करती हैं। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय उद्योग विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं द्वारा इंजीनियरिंग डिजाइन, सब-सिस्टम सत्यापन, तकनीकी प्रस्तुतियों, सुरक्षा मानकों और प्रोटोटाइप प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
टीम वेगापॉड की इस सफलता के पीछे हाइपरलूप प्रणाली को अधिक ऊर्जा-कुशल, किफायती और टिकाऊ बनाने के लिए विकसित किए गए कई अभिनव इंजीनियरिंग समाधान महत्वपूर्ण रहे। टीम ने ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थ्रस्ट के लिए फ्लैट लीनियर मोटर प्रोपल्शन प्रणाली विकसित की है। इसके साथ ही हल्के वजन और कम लागत वाले मॉड्यूलर चेसिस के जरिए निर्माण और रखरखाव को आसान बनाते हुए संरचनात्मक दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
टीम ने अपने नवाचारों के क्षेत्र में मजबूत बौद्धिक संपदा भी विकसित की है। इसके तहत चार भारतीय पेटेंट प्रकाशित किए गए हैं, जबकि जर्मनी में एक पेटेंट प्राप्त किया गया है। यह उपलब्धि टीम के अनुसंधान और तकनीकी नवाचार की मौलिकता को दर्शाती है।
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि यूरोपियन हाइपरलूप वीक में यह सफलता अनुभवात्मक शिक्षा, अंतर-विषयक अनुसंधान और नवाचार आधारित शिक्षा की शक्ति को प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय विद्यार्थी भविष्य की परिवहन एवं गतिशीलता संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं।
प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दल में 11 छात्र इंजीनियर और दो फैकल्टी सलाहकार शामिल रहे। टीम ने अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और नवाचारकर्ताओं के साथ संवाद एवं सहयोग करते हुए विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रदर्शन किया। टीम की यह उपलब्धि वर्षों के अनुसंधान, डिजाइन, प्रोटोटाइप तैयार करने, परीक्षण और अंतर-विषयक टीमवर्क का परिणाम है।
यूरोपियन हाइपरलूप वीक-2026 में मिली इस वैश्विक मान्यता से एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की उन्नत गतिशीलता अनुसंधान के क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत हुई है। साथ ही, यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग छात्रों की बढ़ती तकनीकी क्षमता और नवाचार की ताकत को भी रेखांकित करती है। टीम वेगापॉड की सफलता को भारत की अगली पीढ़ी की परिवहन तकनीक में बढ़ती भागीदारी और युवा इंजीनियरों की नवाचार क्षमता की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।