संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन में उत्तराखंड निभाए अग्रणी भूमिका: राज्यपाल
लोक भवन में स्वस्तिवाचनम् संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की शिष्टाचार भेंट
देहरादून, 01 अगस्त। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से शनिवार को लोक भवन में स्वस्तिवाचनम् संस्था के ट्रस्टी श्री हरीश चन्द्र जोशी तथा संस्था के सदस्य डॉ. सुनील जोशी और डॉ. जीवन जोशी ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल के साथ संस्कृत, योग एवं आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन तथा व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने संस्कृत विद्वान आचार्य श्री दिनेश चंद्र जोशी को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट राज्यपाल को भेंट किया।
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत हमारी अमूल्य धरोहर और ज्ञान का शाश्वत स्रोत है। यह भाषा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्वरूप से परिचित कराती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि इस समृद्ध भाषा और इसके ज्ञान को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर संस्कृत साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा और इससे जुड़े विषयों को वैश्विक स्तर पर अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
राज्यपाल ने संस्कृत, योग और आयुर्वेद जैसी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी विधाओं के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।