आईआईटी रुड़की ने रखा ‘उत्तराखंड हाइड्रोजन वैली’ का विज़न, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिलेगी नई दिशा

रुड़की 26 मई। Indian Institute of Technology Roorkee ने सोमवार को हाइड्रो एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग (एचआरईडी) तथा पिनाका ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से “उत्तराखंड इंडस्ट्री-अकादमिक कॉन्क्लेव ऑन हाइड्रोजन (यूआईएसीएच-2026)” का आयोजन किया। कॉन्क्लेव में नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लेकर उत्तराखंड में ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य पर व्यापक चर्चा की।
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण पहल “उत्तराखंड हाइड्रोजन वैली” का प्रस्ताव रहा। इस विज़न के तहत आईआईटी रुड़की को केंद्रीय ज्ञान एवं नवाचार केंद्र बनाते हुए हब-एंड-स्पोक मॉडल विकसित करने की योजना प्रस्तुत की गई। इसका उद्देश्य राज्य में हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, परिवहन और औद्योगिक उपयोग के लिए एक समग्र हाइड्रोजन वैल्यू चेन तैयार करना है।
कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तराखंड में ग्रीन हाइड्रोजन नीति को सफल बनाने में आईआईटी रुड़की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संस्थान उन्नत शोध, पायलट प्रोजेक्ट, तकनीकी विकास, नीति समर्थन, कौशल विकास और उद्योग साझेदारी के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देगा।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉन्क्लेव समन्वयक प्रो. सोनल के. थेंगाने ने की। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में सतत हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह, जोधपुर हाइड्रोजन वैली के अध्यक्ष प्रो. आर.आर. सोंडे, आईआईटी रुड़की के डीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रो. इंदरदीप सिंह और प्रो. एस.के. सिंगल ने भी अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव (ऊर्जा, नियोजन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई) डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ औद्योगिक विकास और सतत आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बन सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, अकादमिक जगत और नवाचार संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड को देश के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है।
कॉन्क्लेव के दौरान “उत्तराखंड हाइड्रोजन वैली की संभावनाएं” विषय पर उच्चस्तरीय पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें नीति समर्थन, औद्योगिक भागीदारी और हाइड्रोजन अवसंरचना विकास पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा उद्योगों और सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा में राज्य में हाइड्रोजन की भविष्य की मांग और व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने THDC India Limited के ऋषिकेश स्थित ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का दौरा भी किया, जहां उन्हें ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक और उसके संचालन की प्रत्यक्ष जानकारी दी गई।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा कि यूआईएसीएच-2026 जैसे मंच अकादमिक संस्थानों, उद्योगों और सरकारी एजेंसियों को एक साथ लाकर स्वच्छ ऊर्जा समाधान और सतत औद्योगिक परिवर्तन को गति देने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के निम्न-कार्बन भविष्य की दिशा में आईआईटी रुड़की जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।


