पद्मभूषण से सम्मानित हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी
नई दिल्ली 25 मई
। Bhagat Singh Koshyari को लोक कार्य के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया। सोमवार को Droupadi Murmu ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
समारोह में उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan, प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah सहित केंद्र सरकार के कई मंत्री और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कुल 66 पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें 2 पद्म विभूषण, 6 पद्मभूषण और 58 पद्मश्री सम्मान शामिल हैं। पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं और कला, समाज सेवा, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, खेल, सिविल सेवा तथा सार्वजनिक जीवन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते हैं।
उत्तराखंड में ‘भगत दा’ के नाम से लोकप्रिय भगत सिंह कोश्यारी एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, पत्रकार और राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपना जीवन जनसेवा और समाज के गरीब एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक रहे हैं और अपनी सादगी, अनुशासन तथा अध्ययनशीलता के लिए पहचाने जाते हैं।
17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के दूरस्थ गांव पलानधुरा में जन्मे श्री कोश्यारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटा जिले के राजा का रामपुर में व्याख्याता के रूप में की, लेकिन बाद में शिक्षा और समाज सेवा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया।
राजनीतिक जीवन में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वर्ष 1997 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य नामित किए गए। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वे राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के मुख्यमंत्री भी रहे। उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई। इसके बाद वे राज्यसभा सदस्य तथा नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से लोकसभा सांसद चुने गए।
5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इसके अतिरिक्त अगस्त 2020 में उन्होंने गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ भगत सिंह कोश्यारी साहित्य और लेखन से भी जुड़े रहे हैं। उनकी पुस्तकें “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” और “उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान” उत्तराखंड राज्य के विकास और उसके भविष्य को लेकर उनकी सोच और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
भगत सिंह कोश्यारी का जीवन राष्ट्र सेवा, नेतृत्व और समाज के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण माना जाता है।


