देहरादून में होगा एकीकृत पर्यावरण क्षमता निर्माण कार्यशाला का अगला चरण
IIM काशीपुर के सफल आयोजन के बाद राज्य में मॉडल को विस्तार देने की तैयारी

देहरादून । पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून द्वारा एकीकृत पर्यावरण क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित करने की अहम पहल की गई है। इस पहल के तहत अप्रैल माह में देहरादून में एक बड़े स्तर की कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें उद्योग जगत, शिक्षाविदों, सलाहकारों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय क्षमताओं का समग्र विकास करते हुए पर्यावरण के प्रभावी प्रबंधन को टिकाऊ औद्योगिक विकास से जोड़ना है।
इस पहल के पायलट चरण के रूप में 27 फरवरी 2026 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर में राज्य स्तरीय पर्यावरणीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में 210 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और सभी को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
कार्यशाला का मुख्य विषय रहा—
“सस्टेनेबिलिटी के लिए पर्यावरण नियमों को समझना: आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लिए EIA, PARIVESH 2.0, सहमति का तरीका और कम्प्लायंस के लिए एक प्रैक्टिकल गाइड।”
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून के अपर निदेशक डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि एकीकृत पर्यावरणीय क्षमता निर्माण का यह मॉडल मार्च-अप्रैल में देहरादून में बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा और भविष्य में इसे देशभर में लागू करने की योजना है। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने के लिए उद्योग जगत से सक्रिय सहयोग की अपील की।
IIM काशीपुर में आयोजित कार्यशाला में पर्यावरण प्रभाव आंकलन (EIA), पर्यावरणीय स्वीकृति (EC), डिजिटल प्लेटफॉर्म PARIVESH 2.0, ऑनलाइन कंसेंट प्रोसेस, कम्प्लायंस मैनेजमेंट, और आने वाले यूनिफाइड कंसेंट एंड ऑथराइजेशन मैनेजमेंट सिस्टम (UCAMS) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी और प्रबंधन सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने पर्यावरणीय नियमों की व्यावहारिक समझ, वैज्ञानिक डेटा कलेक्शन, और प्रोएक्टिव एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट पर जोर दिया।
कार्यशाला में उद्योग–शिक्षा–रेगुलेटर के मजबूत जुड़ाव को सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल ग्रोथ की कुंजी बताया गया। प्रतिभागी उद्योग प्रतिनिधियों ने इसे उत्तराखंड में कम्प्लायंस-ओरिएंटेड इकोसिस्टम विकसित करने और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंडियन ग्लाइकॉल्स लिमिटेड, नैनी पेपर्स लिमिटेड, सेंचुरी पल्प एंड पेपर, पॉलीप्लेक्स कॉर्पोरेशन सहित कई प्रमुख औद्योगिक समूहों और नॉलेज पार्टनर्स का अहम सहयोग रहा।
आयोजकों के अनुसार, इस तरह की क्षमता निर्माण कार्यशालाएं भविष्य में भी निरंतर आयोजित की जाएंगी, ताकि पर्यावरणीय कम्प्लायंस को एक रणनीतिक अवसर के रूप में अपनाते हुए सतत और जिम्मेदार औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके।


