उत्तराखण्डराजनीति

नारी शक्ति अधिनियम, लोकतांत्रिक इतिहास का स्वर्णिम दस्तावेज : दीप्ति रावत

महिला हित में दलगत राजनीति से ऊपर उठें सभी दल, करें अधिनियम का समर्थन: दीप्ति रावत*

*1952 में 5 फीसदी से शुरू महिला सांसदी का सफर, कानून के बाद 33 फीसदी पार होगा!*

*अधिनियम से बढ़ेगी महिला भागेदारी, होगा लोकतंत्र मजबूत : रुचि भट्ट*

देहरादून 12 अप्रैल। भाजपा महिला नेतृत्व ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश में लोकतंत्र का स्वर्णिम इतिहास सृजित करने वाला बताया है। प्रदेश महामंत्री श्रीमती दीप्ति रावत ने सशक्तिकरण के लिए माताओं बहिनों की तरफ से सभी पार्टियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए संसद में अधिनियम के समर्थन का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ यह ऐतिहासिक कार्य देश की महिलाओं के विश्वास और आकांक्षाओं को नई दिशा और गति देगा। वहीं उम्मीद जताई कि महिला सांसदों का जो सफर 1952 में 5 फीसदी से शुरू होकर 7 दशकों बाद भी मात्र 14-15 फीसदी पहुंचा था, वहीं अब इस कानून के साथ 33 फीसदी के पार पहुंच जाएगा।

पार्टी मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी की महिला नेताओं द्वारा आयोजित एक पत्रकार वार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का प्रबल समर्थन एवं स्वागत किया गया। इस अवसर पर बीजेपी प्रदेश महामंत्री दीप्ती रावत, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट, विधायक सविता कपूर सहित महिला मोर्चा की अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इस दौरान श्रीमती दीप्ति रावत ने कहा कि 16 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में प्रस्तुत होने जा रहा “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” देश की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त संकल्प का प्रतीक है। यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी एवं प्रतिनिधिक बनाएगा। जो महिलाओं की भागीदारी शासन प्रशासन में बढ़ाएगा, जिससे उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, इस विधेयक के पारित होने से लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा, जिससे महिलाएं अब केवल मतदाता या लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया की सक्रिय भागीदार बनेंगी। उन्होंने कहा कि इससे देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय अधिक संवेदनशील, संतुलित एवं जनहितकारी होंगे।

इस दौरान भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ उसमें वृद्धि तो हुई है, लेकिन यह अभी भी संतोषजनक स्तर तक नहीं पहुँच पाई है। 1952 की पहली लोकसभा में केवल लगभग 5% महिलाएँ थीं, जबकि हाल की लोकसभा में यह संख्या बढ़कर लगभग 14–15% तक पहुँची है। राज्यसभा में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 17% के आसपास है, जबकि राज्य विधानसभाओं में यह औसतन केवल 9% ही है। इसके विपरीत, जहाँ स्थानीय निकायों (पंचायत और नगर निकाय) में 33% से 50% तक आरक्षण लागू किया गया, वहाँ महिलाओं की भागीदारी लगभग 46% तक पहुँच गई है, जो यह दर्शाता है कि आरक्षण महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता बढ़ाने में प्रभावी सिद्ध हुआ है।

इसी पृष्ठभूमि में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम के रूप में सामने आया है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की सीटों में भी महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल होगा। लागू होने के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या लगभग तीन गुना तक बढ़ जाएगी, जिससे उनका प्रतिनिधित्व सीधे 33% तक पहुँच जाएगा। इससे न केवल राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति-निर्माण में भी उनकी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित होगी, विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा, वह करके दिखाया है।” पिछले लगभग 40 वर्षों से महिलाओं को विधायी निकायों में आरक्षण देने के प्रयास होते रहे, अनेक सरकारें आईं और गईं, लेकिन कोई भी इस महत्वपूर्ण विषय पर ठोस निर्णय लेने का साहस नहीं दिखा पाया। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक कार्य संभव हो पाया है, जो देश की महिलाओं के विश्वास और आकांक्षाओं को नई दिशा देगा।

इस अवसर पर मौजूद महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट ने कहा, यह अधिनियम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदारी का अवसर भी प्रदान करेगा। केंद्र सरकार द्वारा बीते वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यों का जिक्र करते हुए कहा, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “उज्ज्वला योजना”, “प्रधानमंत्री आवास योजना”, “स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण” जैसे अनेक प्रयासों के माध्यम से महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम इन सभी प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ करेगा और महिलाओं को नेतृत्व की मुख्य धारा में स्थापित करेगा।

उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक निर्णय को जन-जन तक पहुंचाएंगे और महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेंगे। जिसके क्रम में महिला मोर्चा प्रदेशभर में जागरूकता अभियान चलाकर इस अधिनियम के महत्व को प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएगा।

पत्रकार वार्ता में मौजूद देहरादून कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर ने कहा कि यह विधेयक आने वाली पीढ़ियों की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि अब देश की बेटियां बड़े सपने देखने के साथ-साथ उन्हें साकार करने के लिए मजबूत मंच भी प्राप्त करेंगी।

इस दौरान उपस्थित सभी महिला नेत्रियों ने एक स्वर में कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। यह न केवल महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय की भावना को भी मजबूत करेगा।इस दौरान महिला मोर्चा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि यह निर्णय “नारी शक्ति” के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण की दिशा में एक युगांतकारी कदम है, जो भारत को एक अधिक सशक्त, समतामूलक और विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती कमलेश रमन,
महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री डॉ हिमानी डिमरी, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश मीडिया संयोजक डॉ दिव्या नेगी, भाजपा महिला मोर्चा प्रवक्ता श्रीमती लक्ष्मी अग्रवाल, प्रवक्ता, मोर्चा कार्यालय सह प्रभारी, श्रीमती बबली चौहान भी उपस्थित रहे।

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