सांसद अजय भट्ट के सवाल पर केंद्र का जवाब: देशभर में 1.07 करोड़ मामले ई-फाइलिंग से दर्ज, उत्तराखंड में 1.02 लाख से अधिक

नई दिल्ली/देहरादून,13 मार्च 2026। नैनीताल–ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा सत्र के दौरान न्यायालयों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग और ई-फाइलिंग की स्थिति को लेकर तारांकित प्रश्न पूछा। इसके जवाब में विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने देश में ई-न्यायालय परियोजना के तहत हो रहे व्यापक डिजिटलीकरण की जानकारी दी।
मंत्री ने बताया कि न्यायिक प्रणाली में आईसीटी के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना को पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसके तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्चुअल कोर्ट, ई-फाइलिंग, ई-पेमेंट, न्यायालय अभिलेखों का डिजिटलीकरण, उन्नत केस मैनेजमेंट सिस्टम और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं।
सरकार के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक न्यायालयों में 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। वहीं ट्रैफिक चालानों के ऑनलाइन निस्तारण के लिए देशभर में 30 वर्चुअल न्यायालय स्थापित किए गए हैं, जिन्हें अब तक 10.13 करोड़ चालान प्राप्त हुए हैं और 1002.73 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
देश के सभी उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम लागू किए जा चुके हैं। वर्तमान में 3240 न्यायालय परिसरों और 1272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, जिसके माध्यम से 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाई की जा चुकी हैं। इसके अलावा 11 उच्च न्यायालयों में न्यायालय कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग भी शुरू की गई है।
मंत्री ने बताया कि ई-फाइलिंग और ई-पेमेंट प्रणाली के माध्यम से मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग और अदालत शुल्क का डिजिटल भुगतान संभव हो गया है। अब तक लगभग 1.07 करोड़ मामले ई-फाइलिंग के माध्यम से दर्ज किए गए हैं, जबकि 1404 करोड़ रुपये की न्यायालय फीस और 75 करोड़ रुपये के जुर्माने का डिजिटल भुगतान किया गया है।
इसके साथ ही राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के जरिए पूरे देश के न्यायालयों के मामलों का डेटा और आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जिससे लंबित मामलों की निगरानी और प्रबंधन में मदद मिल रही है।
मंत्री ने बताया कि न्यायालयों में डिजिटल सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एसएमएस और 6 लाख से अधिक ई-मेल के माध्यम से वकीलों और वादकारियों को मामलों की जानकारी भेजी जा रही है, जबकि ई-कोर्ट सर्विसेज मोबाइल ऐप को अब तक 3.59 करोड़ से अधिक डाउनलोड किया जा चुका है।
उत्तराखंड में भी ई-फाइलिंग लागू
सरकार ने बताया कि ई-फाइलिंग प्रणाली देश के 25 उच्च न्यायालयों और उनके अधीन जिला न्यायालयों में लागू है, जिनमें उत्तराखंड उच्च न्यायालय और उससे जुड़े सभी जिला न्यायालय शामिल हैं।
13 मार्च 2026 तक उत्तराखंड में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 341 मामलों और जिला न्यायालयों में 1,01,854 मामलों सहित कुल 1,02,195 मामलों की ई-फाइलिंग दर्ज की जा चुकी है।
जागरूकता और प्रशिक्षण पर भी जोर
केंद्र सरकार ने बताया कि ई-फाइलिंग को बढ़ावा देने के लिए न्यायालय कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षमता निर्माण कार्यशालाएं, ई-कोर्ट सेवा पोर्टल पर यूजर मैनुअल, न्यायालय परिसरों में स्थापित ई-सेवा केंद्र तथा विभिन्न आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इन पहलों से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सुलभ बनाने में मदद मिल रही है तथा देश में पेपरलेस और डिजिटल न्यायालय प्रणाली की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है।


