मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परमार्थ निकेतन में 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में किया प्रतिभाग
योग को बताया विश्व शांति और आत्मिक संतुलन का सार्वभौमिक विज्ञान

*उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी बनाने हेतु “योग नीति 2025” लागू*
*योग एवं ध्यान केंद्रों के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान*
*गढ़वाल और कुमाऊं में स्थापित होंगे ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन’*
*आयुष, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने हेतु बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान*
ऋषिकेश 13 मार्च । 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज योग नगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से पधारे योग साधकों, योगाचार्यों एवं महानुभावों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनका परम सौभाग्य है कि उन्हें इस भव्य अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ गंगा की दिव्य आरती में सहभागी बनना तथा विश्वकल्याण हेतु आयोजित पवित्र यज्ञ में आहुति अर्पित करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की पुण्य भूमि से निकली प्राचीन और महान विधा है, जिसे आज विश्वभर के करोड़ों लोग अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला सार्वभौमिक विज्ञान है, जो आत्मिक शांति प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि आज जब विश्व तनाव, अवसाद और जीवनशैली जनित रोगों से जूझ रहा है, ऐसे समय में योग एक “नेचुरल हीलिंग सिस्टम” के रूप में आत्मिक शांति और संतुलन प्रदान कर रहा है। योगासन और प्राणायाम के माध्यम से शरीर और मन को तनावमुक्त किया जा सकता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग ने जाति, भाषा, धर्म और भूगोल की सीमाओं को पार कर मानव समाज को जोड़ने का कार्य किया है तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के संदेश को विश्वभर में पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में रखा गया, जिसके परिणामस्वरूप आज 180 से अधिक देशों में योग का व्यापक अभ्यास हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि योग और अध्यात्म की भूमि भी है। राज्य की नैसर्गिक सुंदरता और शुद्ध वातावरण योग साधना के लिए अत्यंत अनुकूल है। इसी दृष्टि से राज्य सरकार ने उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी बनाने हेतु देश की पहली “योग नीति 2025” लागू की है।
उन्होंने बताया कि योग एवं ध्यान केंद्र विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी तथा शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। साथ ही पाँच नए योग हब स्थापित किए जा रहे हैं तथा सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में योग सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष वेलनेस सेंटर एवं नेचुरोपैथी केंद्रों को भी निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हैं तथा प्रत्येक जनपद में 50 एवं 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘उत्तराखंड आयुष नीति’ के माध्यम से औषधि निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, शोध एवं औषधीय पौधों के संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडलों में एक-एक ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन’ की स्थापना हेतु बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित योगाचार्य अपने ज्ञान एवं अनुभव साझा कर रहे हैं तथा हठ योग, राज योग, कर्म योग एवं भक्ति योग के साथ ध्यान, प्राणायाम एवं प्राकृतिक चिकित्सा संबंधी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन पिछले 80 वर्षों से भारतीय संस्कृति, योग और अध्यात्म के माध्यम से विश्व को जोड़ने का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह महोत्सव योग, प्राणायाम और आध्यात्म के माध्यम से मानवता को शांति एवं सद्भाव के मार्ग पर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन से स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती, गायक श्री कैलाश खेर, विभिन्न देशों से आए योगाचार्य, योग प्रशिक्षक तथा पर्यटक उपस्थित रहे|


