उत्तराखण्डकृषि खेती

ड्रैगन फ्रूट, कीवी व अति सघन सेब बागवानी से उत्तराखंड बनेगा “फल पट्टी”

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने दिए क्लस्टर आधारित विकास के निर्देश

देहरादून,20 फरवरी। राज्य में फल उत्पादन को बढ़ावा देने और पर्वतीय क्षेत्रों में फलोत्पादन को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने ठोस पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उत्तराखंड को “फल पट्टी” के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना के अंतर्गत कीवी उत्पादन, सेब की अति सघन बागवानी योजना तथा सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन (सुफल) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि उच्च हिमालयी एवं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियां फलोत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। इन प्राकृतिक विशेषताओं के अनुरूप उपयुक्त फल प्रजातियों एवं उच्च उत्पादकता वाली किस्मों का चयन कर क्लस्टर आधारित और तकनीक समर्थित मॉडल अपनाना आवश्यक है।
मुख्य सचिव के प्रमुख निर्देश
न्यूनतम 10 क्लस्टरों का चरणबद्ध विकास सुनिश्चित किया जाए।
ड्रैगन फ्रूट, कीवी एवं सेब उत्पादन में कम से कम 30 प्रोग्रेसिव किसानों को तैयार किया जाए।
उच्च उत्पादकता वाली वैरायटी का चयन कर वैज्ञानिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाए।
योजनाओं में औपचारिकता के बजाय धरातल पर स्पष्ट परिणाम सुनिश्चित हों।
किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, फील्ड डेमो और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
क्लस्टर विकास से संबंधित गतिविधियों का फोटो/वीडियो दस्तावेजीकरण कर जायका पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
कीवी व सेब उत्पादन पर विशेष फोकस
बैठक में उद्यान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कीवी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूज़ीलैंड से आई 5 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर तकनीकी सुझाव और सहायता दी जा रही है। वहीं, एप्पल मिशन और अति सघन बागवानी योजना के तहत उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उन्नत किस्मों, पौध गुणवत्ता सुधार और बाजार-उन्मुख उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सुफल योजना से बढ़ेगी किसानों की आय
सेब की तुड़ाई उपरांत प्रबंधन (सुफल) योजना के अंतर्गत भंडारण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ कर मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
विश्वविद्यालयों को सौंपी अहम भूमिका
मुख्य सचिव ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय तथा वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार को ऊंचाई और जलवायु के अनुसार उपयुक्त फल प्रजातियों के सर्वेक्षण, उच्च उत्पादकता वाली वैरायटी के विकास और किसानों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि के साथ-साथ राज्य की आर्थिकी को सुदृढ़ करना है। क्लस्टर आधारित, तकनीक समर्थित और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना के माध्यम से उत्तराखंड को फल उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव एल.एल. फैनई, सचिव उद्यान एवं प्रसंस्करण एस.एन. पांडेय, अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट एवं हिमांशु खुराना, भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति परविंदर कौशल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button