हिमालय संरक्षण राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा विषय है: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
डॉ.नित्यानंद जन्मशताब्दी समारोह में सीएम ने सतत हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार से किया सम्मानित
देहरादून 09 फरवरी । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सतत हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार 2025-26 से जयेंद्र सिंह राणा एवं संजय सत्यवली को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी सोच हिमालय की शिखरों जैसी ऊँची और सेवा-भाव हिमालय की घाटियों जितना गहरा था। उनका मानना था कि हिमालय की रक्षा भारतीय सभ्यता और राष्ट्र के भविष्य की रक्षा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने विज्ञान को अध्यात्म से, शोध को लोकजीवन से और चिंतन को राष्ट्रहित से जोड़ा। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संचार किया तथा ग्राम सशक्तिकरण के लिए आजीवन कार्य किया। वे प्रतिवर्ष अपनी आय से लगभग 40 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1991 की उत्तरकाशी तथा 1999 की चमोली आपदा के बाद डॉ. नित्यानंद ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत एवं पुनर्वास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो आज भी अनुकरणीय है। उन्होंने मनेरी गांव को केंद्र बनाकर 400 से अधिक भूकंपरोधी मकानों का निर्माण कराया तथा 50 से अधिक गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. नित्यानंद द्वारा गठित ‘उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति’ आज भी देशभर में आपदाओं के समय मानवता की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। देहरादून में संचालित डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके विचारों को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है, जो हिमालयी अध्ययन, सतत विकास और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नई दिशा दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण हेतु निरंतर कार्य कर रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर और जल स्रोत संरक्षण अभियानों के माध्यम से दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है तथा डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से अब तक 72 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पौधारोपण, जल संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता अभियानों के साथ-साथ सौर ऊर्जा एवं अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु स्प्रिंग एंड रिवर रीजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य स्मरणीय अवसरों पर एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल करें, जिससे देवभूमि में पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिले।
कार्यक्रम में आर.एस.एस. के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विधायक विनोद चमोली, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक बृजभूषण गैरोला, डॉ. कमलेश कुमार, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक प्रेम बड़ाकोटी, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, रविदेवानंद सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।