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उत्तराखण्ड में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य पर्यवेक्षण बोर्ड की बैठक सम्पन्न

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य में गर्भधारण पूर्व और प्रसूति पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य पर्यवेक्षण बोर्ड की बैठक का आयोजन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनसिंह रावत की अध्यक्षता में किया गया।

बैठक में सचिव स्वास्थ्य द्वारा अन्तरराज्यीय एवं अन्तरजनपदीय सूचनाओं के आदान-प्रदान पर बल दिया गया, वहीं विधायक श्रीमती सविता कपूर ने योजना के प्रचार-प्रसार के सुझाव रखे।

महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा ने राज्य में मेडिकल स्टोर्स पर Misoprostol drug की अनियंत्रित बिक्री का मुद्दा उठाते हुए, बिना चिकित्सकीय परामर्श इस दवा को न दिए जाने का निर्णय लिया।

अपर सचिव महिला एवं बाल विकास ने जन्म पंजीकरण पर जन-जागरूकता बढ़ाने और जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य करने पर जोर दिया। साथ ही हेल्पलाइन 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री ने बोर्ड के नामित सदस्यों को जनपद भ्रमण कार्यक्रम निर्धारित करने के निर्देश दिए, ताकि जिला स्तर पर अधिनियम 1994 के अन्तर्गत किए गए कार्यों की समीक्षा हो सके। अगली बैठक 29 सितम्बर 2025 को प्रस्तावित की गई।

बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, अपर सचिव न्याय एम. के. पांडे, उप सचिव अनूप मिश्रा, महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक डॉ. शिखा जंगपागी, राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एन.एस. बिष्ट, सहायक डॉ. अमलेश कुमार सिंह, राकेश बहुगुणा, अपर शोध अधिकारी अवधेश कुडियाल, विधि सलाहकार दीपक पवार समेत बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे।

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