रामलीला में कैकेयी के दो वरदानों का मंचन, श्रीराम के वनवास पर भावुक हुए दर्शक
जलालाबाद के रामलीला भवन में राम-सीता विवाह के बाद की लीला का मंचन, वनगमन का दृश्य देख दर्शकों की आंखें हुईं नम
जलालाबाद 12 अक्टूबर
। कस्बे के रामलीला भवन में चल रही आदर्श श्रीरामलीला में रविवार की रात कलाकारों ने राम-सीता विवाह के बाद की लीला का भावपूर्ण मंचन किया। श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद अयोध्या आगमन, श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों तथा महारानी कैकेयी के दो वरदान मांगने से लेकर श्रीराम के वनवास तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। वनवास के दृश्य ने रामलीला देखने पहुंचे दर्शकों को भावुक कर दिया।
मंचन के दौरान दिखाया गया कि भगवान श्रीराम और माता जानकी के विवाह के बाद अयोध्या पहुंचने पर पूरी नगरी में उत्सव का माहौल छा जाता है। चारों ओर खुशियां मनाई जाती हैं। इसके बाद महाराजा दशरथ श्रीराम को अयोध्या का राजकाज सौंपने और उनके राज्याभिषेक का निर्णय लेते हैं। इसी बीच दासी मंथरा के बहकावे में आकर महारानी कैकेयी महाराजा दशरथ से पूर्व में दिए गए दो वरदान मांग लेती हैं।
कैकेयी महाराजा दशरथ को उनके द्वारा दिए गए वचनों की याद दिलाती हैं। इस पर महाराजा दशरथ उन्हें इच्छानुसार वरदान मांगने की अनुमति देते हैं। रघुकुल की मर्यादा का स्मरण करते हुए वे कहते हैं, “रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए।”
इसके बाद महारानी कैकेयी पहले वरदान में भरत को अयोध्या का राजा बनाने और दूसरे वरदान में भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग करती हैं। श्रीराम के वनवास की बात सुनकर महाराजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं और विलाप करने लगते हैं। इस प्रसंग का कलाकारों ने मार्मिक अभिनय किया।
इसके बाद भगवान श्रीराम पिता से वन जाने की आज्ञा लेने पहुंचते हैं। उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण भी 14 वर्ष के वनवास पर जाने का निर्णय लेते हैं। पिता की आज्ञा लेकर श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता वन की ओर प्रस्थान करते हैं। वनगमन के इस दृश्य को देखकर रामलीला पंडाल में मौजूद दर्शक भावविभोर हो गए। कई दर्शकों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
इस दौरान रामलीला पंडाल दर्शकों से खचाखच भरा रहा। कलाकारों के सजीव अभिनय ने भगवान श्रीराम के त्याग, मर्यादा, पितृभक्ति और वचन पालन के आदर्शों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में व्यास गद्दी पर किशोरी शरण महाराज विराजमान रहे। आयोजन में अवनीश आहूजा, राजकुमार रुहेला, देवराज जुनेजा, देवेंद्र शर्मा, सुनहरा सिंह, जनेश्वर सैनी, राजेश सैनी, अंशुल कुमार, हिमांशु जुनेजा और संजीव आहूजा सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।