उत्तर प्रदेशधर्म-कर्म

उत्तम आर्जव धर्म की आराधना से गूंजा जैन मंदिर,मन, वचन और कर्म में सरलता ही उत्तम आर्जव धर्म का सार

दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था

जलालाबाद (शामली) 18 सितम्बर । श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में उत्तम आर्जव धर्म की विशेष आराधना, पूजन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और भगवान जिनेंद्र देव के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं ने मन, वचन और कर्म में एकरूपता, सरलता तथा निष्कपटता अपनाने का संकल्प लिया। जैन धर्म में आर्जव का अर्थ छल-कपट से रहित होकर सरल एवं सहज जीवन जीना है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि मन में कुछ और, वाणी में कुछ और तथा कर्म में कुछ और रखने के बजाय जीवन में विचार, वाणी और व्यवहार की शुद्धता बनाए रखना ही सच्चे अर्थों में आर्जव धर्म की आराधना है।
मंदिर में भगवान जिनेंद्र देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हुए आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान दिनेश कुमार जैन, पारस जैन, कुलदीप जैन, संदीप जैन, हिमांशु, वैष्णवी जैन, अनिल जैन, रंजना जैन एवं निखिल जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
दशलक्षण महापर्व के दसों दिनों में मंदिर में धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला जारी है। प्रतिदिन शाम को भक्ताम्बर स्तोत्र के 48 श्लोकों का सामूहिक पाठ श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है। तीसरे दिन भी पाठ के दौरान मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष शीश नवाकर परिवार एवं समाज के सुख-शांति की कामना की।
दशलक्षण पर्व के प्रत्येक दिन एक विशेष धर्म की आराधना के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मसंयम, आत्मशुद्धि और सदाचार की प्रेरणा दी जा रही है। मंदिर में चल रहे धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह धर्ममय बना हुआ है।

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