उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

देवभूमि की धर्म-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प, धर्म सभा में गूंजा ‘राष्ट्र प्रथम, सनातन प्रथम’ का संदेश

देहरादून, 02 सितंबर। भारतीय जनता पार्टी धर्म-संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ की ओर से बुधवार को जंगम शिवालय, पलटन बाजार में धर्म सभा का आयोजन किया गया। टपकेश्वर महादेव मंदिर के श्री महंत 108 कृष्ण गिरी जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित धर्म सभा की अध्यक्षता प्रकोष्ठ के संयोजक एवं प्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाई ने की, जबकि संयोजन प्रकोष्ठ के सह संयोजक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने किया। सभा में देहरादून के विभिन्न मंदिरों के पुजारी, धर्माचार्य एवं संतजन उपस्थित रहे।
धर्म सभा में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में देवभूमि उत्तराखंड के देवत्व, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। इस दौरान ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ अर्थात जो व्यक्ति या समाज धर्म की रक्षा करता है, धर्म भी उसकी रक्षा करता है—इस विचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।
टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्ण गिरी जी महाराज ने सभी ब्राह्मण बंधुओं का स्वागत करते हुए भारतीय ऋषि-मुनि परंपरा, सनातन संस्कृति और रीति-रिवाजों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।
धर्म सभा के अध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाई ने मंदिर समितियों और पुजारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताते हुए धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने मंदिरों के बुजुर्ग पुजारियों के लिए पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सरकार एवं मंदिर समितियों से सहयोग की अपील की। साथ ही उन्होंने धर्मशालाओं में जरूरतमंद लोगों को उचित मूल्य पर कमरे एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया, ताकि धर्मशालाओं का उद्देश्य और नाम दोनों सार्थक हो सकें।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने कहा कि धर्म और संस्कृति का गौरवशाली एवं वैभवशाली अतीत रहा है और आज इसका स्वर्णिम वर्तमान दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व में भारतीय ऋषि-मुनि परंपरा से निकले अध्यात्म, योग, आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का प्रभाव बढ़ रहा है। इस विरासत को संजोकर रखना प्रत्येक सनातनी का प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम और सनातन प्रथम’ का आह्वान किया।
विद्वत सभा देहरादून के अध्यक्ष आचार्य हर्षपती गोदियाल ने मंदिरों एवं धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को अधिक से अधिक जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं की भागीदारी आवश्यक है।
सुप्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य सुभाष जोशी ने कहा कि वर्तमान देश, काल और परिस्थितियों को देखते हुए भक्ति के साथ आध्यात्मिक शक्ति का सामाजिक रूप से भी प्रकटीकरण होना चाहिए, जिससे धर्म विरोधी शक्तियों को सिर उठाने का अवसर न मिले।
आचार्य उदय शंकर भट्ट ने मंदिरों से अधिक से अधिक सनातन धर्मावलंबियों को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर उत्तराखंड पुरोहित सभा के अध्यक्ष आचार्य हर्षपती घिल्डियाल, आचार्य विजेंद्र ममगाई ने भी अपने विचार रखे। धर्म सभा में उपस्थित सभी लोगों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अग्रिम शुभकामनाएं दी गईं।
इस अवसर पर आचार्य डॉ. राजदीप डिमरी, डॉ. संदीप रतूड़ी, आचार्य जयप्रकाश गोदियाल, आचार्य मनोज ढोढ़ीयाल, धर्म-संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ के सह संयोजक घनश्याम शर्मा, सह संयोजक शेखर श्रीवास्तव, महानगर संयोजक आशीष बलूनी, सह संयोजक विजय डबराल सहित बड़ी संख्या में धर्माचार्य एवं पुजारी उपस्थित रहे।

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