उत्तराखण्डजनकल्याणकारी योजना

आईएसबीटी के अंदर से मिलेगी ओला-ऊबर कैब की सुविधा, बनेंगे निर्धारित बूथ

आईएसबीटी और मॉल परिसर के कायाकल्प को मिलेगी रफ्तार, यात्री सुविधाओं के साथ सुरक्षा और व्यवस्थाएं होंगी मजबूत

देहरादून 17 अगस्त । आईएसबीटी परिसर में यात्रियों को अब ओला-ऊबर सहित अन्य ऑनलाइन कैब सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आईएसबीटी परिसर के भीतर ऑनलाइन कैब सेवाओं के लिए निर्धारित बूथ विकसित किए जाएंगे। इसके लिए यात्री सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त स्थान चिन्हित किया जाएगा। बूथ बनने के बाद कैब बुक करने वाले यात्रियों को वाहन तलाशने में परेशानी नहीं होगी और परिसर में अनावश्यक भीड़, जाम एवं अव्यवस्था पर भी नियंत्रण में मदद मिलेगी।
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में सोमवार को उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में आईएसबीटी परिसर के रेनोवेशन, संचालन, यात्री सुविधाओं, सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था और व्यावसायिक गतिविधियों को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सभी प्रस्तावों पर सहमति बनाते हुए संबंधित कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक में सचिव मोहन सिंह बर्निया सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
दुकानों और कियोस्क के किराये का होगा पुनर्निर्धारण
आईएसबीटी परिसर की सभी दुकानों, कार्यालयों, रेस्टोरेंट और कियोस्क के किराये का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। लंबे समय से लंबित अनुबंधों के नवीनीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। पुराने कियोस्क के स्थान पर नए कियोस्क का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में पुराने लाइसेंसधारियों को नए कियोस्क में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
यदि टेंडर प्रक्रिया में समय लगता है तो नई किराया दरों के आधार पर पुराने लाइसेंसधारियों को अस्थायी रूप से नए कियोस्क में स्थानांतरित किया जा सकेगा। नए अनुबंधों में कड़े नियम एवं शर्तें शामिल की जाएंगी, ताकि कियोस्क किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर देने अथवा व्यवसाय की प्रकृति बदलने जैसी स्थितियों पर रोक लगाई जा सके।
भूतल पर बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं
आईएसबीटी के भूतल का बेहतर उपयोग करने के लिए यूटीसी ऑफिस, यूनियन ऑफिस और हिमाचल रेस्ट रूम को प्रथम तल पर शिफ्ट करने पर सहमति बनी। इन कार्यालयों के ऊपर जाने के बाद खाली होने वाले स्थान का उपयोग यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
वहीं प्रशासनिक कार्यालय में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे सामने स्थित रेस्टोरेंट नंबर-2 में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान प्रशासनिक कार्यालय का उपयोग सर्वर रूम और रिकॉर्ड रूम के रूप में किए जाने की योजना है।
आधुनिक होंगे शौचालय, बदलेगा प्लेटफार्म का फर्श
आईएसबीटी परिसर के शौचालयों का उच्च गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप पुनर्निर्माण किया जाएगा। ए-ब्लॉक स्थित शौचालय का कार्य अंतिम चरण में है। शौचालयों के दुरुपयोग, तोड़फोड़ और चोरी को रोकने के लिए न्यूनतम उपयोग शुल्क निर्धारित करने पर भी सहमति बनी है।
आईएसबीटी के प्लेटफार्म का फर्श चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। निर्माण कार्य के दौरान आवश्यकता के अनुसार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को खाली कराया जाएगा। निर्माण अवधि में प्रतिष्ठान बंद रहने की स्थिति में किराये को नियमानुसार समायोजित अथवा कम करने पर भी सहमति बनी।
पुलिस गश्त बढ़ेगी, बदली जाएंगी पुरानी लाइटें और केबल
आईएसबीटी परिसर में शराबियों, जुआरियों और चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित की जाएगी। कानून-व्यवस्था बेहतर रखने के लिए पुलिस चौकी से नियमित सहयोग लिया जाएगा।
इसके साथ ही परिसर में पुरानी हो चुकी स्ट्रीट लाइट, लाइट पोल और पावर केबल को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। एसटीपी की निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए डीजी रूम से एसटीपी तक करीब 415 मीटर 35 एमएम² x 3.5 कोर आर्मर्ड एल्यूमिनियम एलटी पावर केबल और 400 मीटर 75 एमएम एचडीपीई पाइप उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
निष्प्रयोज्य सामग्री का होगा निस्तारण
रेनोवेशन एवं पुनरुद्धार कार्य के दौरान निकल रही लोहा, टिनशेड सहित अन्य निष्प्रयोज्य सामग्री को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। परिसर में सामग्री जमा होने से यात्रियों के आवागमन में परेशानी हो रही है। ऐसे में निर्माण कार्य के साथ यात्री आवागमन सुचारू रखने के लिए निष्प्रयोज्य सामग्री का जल्द निस्तारण किया जाएगा।
मॉल परिसर का भी होगा सौंदर्यीकरण
बैठक में मॉल परिसर के हार्टिकल्चर और इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की गई। एनएचएआई कार्यालय हटाए जाने और नाले का निर्माण पूरा होने के बाद खाली हुए स्थल पर तारबाड़ एवं सौंदर्यीकरण कराने पर सहमति बनी। इससे अनधिकृत कब्जे, अनावश्यक पार्किंग और गंदगी की समस्या पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
मॉल की तकनीकी व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए चिलर सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा। चिलर सिस्टम में लगे कंडेनसर और इवापोरेटर मोटर पैनल की मरम्मत के साथ अन्य मोटरों के स्टार्टर पैनल में आवश्यक सामग्री एवं रिपेयरिंग का कार्य भी कराया जाएगा।
ड्रिंकिंग वाटर और पंप रूम की समस्याएं होंगी दूर
मॉल परिसर में लगे आठ ड्रिंकिंग वाटर पैनलों को दुरुस्त किया जाएगा। खराब पैनलों को बदला जाएगा और संबंधित मोटरों की ओवरहॉलिंग कराई जाएगी। पंप रूम में जमीन से पानी आने और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए डी-वाटरिंग पंप लगाया जाएगा तथा आवश्यक मरम्मत कार्य भी कराए जाएंगे।
वहीं 11 केवी वैक्यूम सर्किट ब्रेकर रूम और रिंग मेन यूनिट रूम में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए तकनीकी एवं सुरक्षा उपाय किए जाएंगे, ताकि वहां काम करने वाले तकनीशियनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
“आईएसबीटी-मॉल का होगा कायाकल्प” : बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि आईएसबीटी और मॉल परिसर प्राधिकरण की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां हैं। यात्रियों, आमजन और व्यवसायियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ दोनों परिसरों की व्यवस्थाओं को आधुनिक एवं व्यवस्थित करना प्राथमिकता है। आईएसबीटी में रेनोवेशन, शौचालय, प्लेटफार्म, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जाएगी। दुकानों, कियोस्क और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के किराये एवं अनुबंधों को भी नियमानुसार व्यवस्थित किया जाएगा।
समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरेंगे कार्य : मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि आईएसबीटी और मॉल परिसर से जुड़े सभी चिन्हित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। यात्री सुविधाओं, शौचालय, प्लेटफार्म, प्रकाश, विद्युत और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। ओला-ऊबर बूथ, कियोस्क और कार्यालयों की व्यवस्थाओं को भी व्यवस्थित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मॉल परिसर में चिलर सिस्टम, पंप रूम, ड्रिंकिंग वाटर पैनल और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को सभी स्वीकृत कार्यों की प्रक्रिया तेजी से पूरी कर उन्हें समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए हैं।

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