भारत-यूके सीईटीए: वादों को साकार करने का कदम :राजेश अग्रवाल
नई दिल्ली। यूनाइटेड किंगडम के साथ भारत का ‘व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए)’ भारत के विदेशी व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जहां पिछले कम से कम दो दशकों से भारत का आर्थिक एकीकरण पूर्वी एशियाई देशों के साथ जुड़ा हुआ था, वहीं यूनाइटेड किंगडम 1970 के दशक से ही यूरोपीय आर्थिक एकीकरण का हिस्सा रहा है। दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं के लिए, सीईटीए एक बहुत बड़े बदलाव और अपनी बाहरी आर्थिक साझेदारियों में विविधता लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जुलाई 2025 में हस्ताक्षर हो जाने जाने के बाद, सभी घरेलू कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करके सीईटीए 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ। यह बातचीत से लेकर इसके लागू होने तक की संपूर्ण यात्रा को दर्शाता है। यह उत्सव मनाने की घड़ी और दोनों देशों के लिए अपने लंबे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने का अवसर भी है।
सीईटीए भारत के मैन्यूफैक्चरिंग आधार, सेवा क्षेत्र की मजबूती और वैश्विक स्तर पर हमारे कुशल श्रमशक्ति की मांग में भरोसे को दर्शाता है। इस समझौते की खूबी यह है कि इसमें श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए बाजार की सुलभता, सेवाओं की आवाजाही और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। सीईटीए भरसक व्यापक है और यह भारत के नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों के लिए एक आदर्श नमूना है।
इस समझौते का महत्व इसके पैमाने और संतुलन में भी निहित है। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आपसी व्यापार पहले ही लगभग 56 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है और दोनों देशों ने 2030 तक अपने व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। यह समझौता उस लक्ष्य को अपेक्षाकृत अधिक निश्चितता और सटीक पूर्वानुमान के साथ हासिल करने का ढांचा देने के साथ-साथ ‘भारत-यूनाइटेड किंगडम रोडमैप 2030’ की व्यापक रणनीतिक दिशा को भी दर्शाता है। यह समझौता उस विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है और इसका असर समय के साथ दिखाई देगा।
इस समझौते की एक मुख्य विशेषता भारतीय निर्यातों के लिए बाजार की सुलभता सुनिश्चित करना है। भारतीय सामानों को यूनाइटेड किंगडम में लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच (ड्यूटी-फ्री एक्सेस) मिलेगा, जिसमें व्यापार मूल्य का लगभग शत-प्रतिशत हिस्सा शामिल होगा। इससे वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, समुद्री उत्पाद, खेल का सामान, रत्न एवं आभूषण, खिलौने और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (प्रोसेस्ड फूड) जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी। इन क्षेत्रों का अनुमानित मूल्य लगभग 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें भारत के पास बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता, कौशल तथा निर्यात करने की काबिलियत है और जहां बाजार की सुलभता सीधे तौर पर नौकरियों एवं अधिक आमदनी के अवसरों में बदल सकती है। यूनाइटेड किंगडम के परिधानों एवं घरेलू वस्त्र बाजार में 6.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ एक बड़े आपूर्तिकर्ता के तौर पर, सीईटीए से भारत के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को उल्लेखनीय प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे चीन, बांग्लादेश और दूसरे एशियाई आपूर्तिकर्ता देशों के साथ भारत के अंतर को पाटने में भी मदद मिलेगी। इससे भारत को यूनाइटेड किंगडम के 8.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के चमड़ा एवं फुटवियर बाजार में निर्यात करने का एक बड़ा मौका भी मिलेगा। यह समझौता सिर्फ टैरिफ में राहत से ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), छोटे व्यवसायों, कारीगरों और महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए अधिक नौकरियां तथा बाजार के अवसर सृजित करने से भी जुड़ा है।
यह समझौता खेती, मछली पालन (खासकर फ्रोजन झींगे तथा प्रॉन) और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े निर्यात के लिए भी नई संभावनाएं खोलता है। साथ ही, इस समझौते को भारत के संवेदनशील क्षेत्रों – जैसे कि डेयरी, सेब, अनाज और खाद्य तेल – की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बेहद सावधानी से तैयार किया गया है। इनमें से कुछ संवेदनशील उत्पादों को या तो बाहर रखा गया है या टैरिफ रेट कोटा या फिर चरणबद्ध उदारीकरण के जरिए सुरक्षित किया गया है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से सेवा-आधारित होती जा रही है और दोनों ही अर्थव्यवस्थाओं को इसमें तुलनात्मक रूप से ठोस फायदे हासिल हैं। सीईटीए में भारत के निर्यात की दृष्टि से अहम सभी बड़े सेवा क्षेत्र और 137 उप-क्षेत्र शामिल हैं। इनमें आईटी एवं आईटी-आधारित सेवाएं, वित्तीय एवं पेशेवर सेवाएं, व्यवसाय संबंधी परामर्श (बिजनेस कंसल्टिंग), शिक्षा, दूरसंचार, आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग शामिल हैं। इस समझौते में नई वित्तीय सेवाएं देने और फिनटेक, रेगटेक एवं वित्तीय क्षेत्र में विविधता से संबंधित सहयोग से जुड़ी प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच यह नया आर्थिक गलियारा मुख्य रूप से पेशेवरों की आवाजाही (प्रोफेशनल मोबिलिटी) से संबंधित है। सीईटीए अनुबंध-आधारित सेवा प्रदाताओं, व्यवसाय के लिए आने वाले लोगों, एक ही कंपनी के भीतर स्थानांतरित होने वाले कर्मचारियों और स्वतंत्र पेशेवरों के लिए आसान रास्तों का प्रावधान करता है। सीईटीए व्यावसायिक योग्यताओं को आपसी सहमति से मान्यता देने का एक ऐसा ढांचा भी तैयार करता है, जिसमें आपसी हित वाली व्यावसायिक सेवाओं की पहचान करने और ऐसे समझौतों को पूरा करने की एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। सीईटीए भारत के सांस्कृतिक तथा पेशेवर प्रतिभाओं को भी मान्यता देता है और 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षकों और शास्त्रीय संगीतकारों के लिए हर वर्ष मौके प्रदान करेगा। इससे स्पष्ट होता है कि आवाजाही का मतलब सिर्फ कुछ खास पेशेवरों की ही आवाजाही नहीं है, बल्कि इसका संबंध उन श्रेणी की प्रतिभाओं से भी है जिनमें भारत के पास यूनाइटेड किंगडम को प्रदान करने के लिए कुछ खास है।
भारतीय पेशेवरों के लिए एक और अहम फायदा दोहरी अंशदान संधि (डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन) है, जो सीईटीए के साथ ही लागू हुई। इससे भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को यूनाइटेड किंगडम में पांच वर्ष तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान (सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन) करने से छूट मिलेगी। वार्षिक रूप से लगभग 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर का यह सामाजिक सुरक्षा अंशदान उन भारतीय पेशेवरों के लिए एक तरह का ‘संक कॉस्ट’ यानी वापस नहीं मिलने वाला खर्च था, जो यूनाइटेड किंगडम में कम समय या अस्थायी काम के लिए तो जाते थे, लेकिन पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों को पाने के लिए जरूरी समय तक वहां नहीं रुक पाते थे। लगभग 75,000 भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं के लिए यह एक बड़ी राहत है।
कोई भी आधुनिक ‘मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए)’ सामानों एवं सेवाओं तक बाजार की पहुंच के पारंपरिक दायरे से आगे बढ़कर सहयोग के नए क्षेत्रों को शामिल करेगा। सीईटीए ने सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और व्यापार तथा पर्यावरण, श्रम, लैंगिक समानता एवं भ्रष्टाचार-रोधी उपाय जैसे सतत विकास से जुड़े विषयों में संतुलित नियम अपनाए हैं। ये आधुनिक व्यापार समझौतों के नए आयाम हैं। सरकारी खरीद के मामले में, सीईटीए ने ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति आदेश’ के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्राथमिकता देने की भारत की नीतिगत गुंजाइश को बनाए रखा है। इसके अलावा जहां यूनाइटेड किंगडम के आपूर्तिकर्ता ‘श्रेणी-II’ के स्थानीय आपूर्तिकर्ता के तौर पर हिस्सा लेने के पात्र होंगे, वहीं भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को ‘श्रेणी-I’ के स्थानीय आपूर्तिकर्ता के तौर पर प्राथमिकता मिलती रहेगी। इसी तरह, भारत ने आईपीआर से संबंधित अध्याय पर व्यापक बातचीत की है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर अनिवार्य लाइसेंस देने या अन्य लचीले प्रावधानों का उपयोग करने का अधिकार भी पूरी तरह अपने पास सुरक्षित रखा है।
इस समझौते का व्यापक महत्व भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के साथ पूरी तरह मेल खाता है। दोनों साझेदारों के सामने अब विविध क्षेत्रों में किए गए वादों को लागू करने की चुनौती है। सीईटीए के लागू होने के साथ, भारत और यूनाइटेड किंगडम के पास आने वाले दशकों में एक ठोस, रचनात्मक एवं जन-केन्द्रित साझेदारी बनाने का एक दुर्लभ मौका है।
(लेखक वाणिज्य विभाग के सचिव हैं)
***



