उत्तराखण्डराजनीति

मंदिर में पूजा अर्चना वाले कर्मकांडी ब्राह्मणों के प्रति अनस्था, सनातन पद्धति पर अविश्वास जैसा : चमोली

गोदियाल, चढ़ावा चोर आरोपी को संरक्षण देने के दोषी नहीं तो वे सरकार और समिति कैसे दोषी : चमोली

देहरादून 13 जून। भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा है कि मंदिर में पूजा अर्चना वाले कर्मकांडी ब्राह्मणों के प्रति अनास्था, सनातन पद्धति के प्रति अविश्वास को बढ़ाने जैसा है। वहीं उन्होंने कटाक्ष किया कि जब गोदियाल चढ़ावा चोर आरोपी को संरक्षण देने के दोषी नहीं तो वे सरकार, मुख्यमंत्री और पूरी समिति को कैसे दोषी ठहरा सकते हैं।

पार्टी प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मेरा भी ऐसा मानना है जितने भी कर्मकांडी ब्राह्मण हैं और जो पुजारी हैं जो मठों में, मंदिरों में पूजा का काम करते हैं, उनका दान के आधार पर जीवन चलता है। क्योंकि जो भी जजमान होते हैं या जो लोग भी वहाँ पूजा कराने आते हैं या उनसे पूजा करवाते हैं, वो लोग उनको दक्षिणा के रूप में जो भी धनराशि देते हैं उस पर उनका जीवन चलता है। अगर उनके प्रति हम अनास्था रखेंगे तो कहीं न कहीं सनातन के प्रति हमारी अनास्था हो जाएगी। तो हमको भी इस बात को स्वीकारना चाहिए कि अगर कोई घटना कहीं घटित हुई भी है तो बहुत बड़ा समाज है, बहुत बड़ा तंत्र है जो इस कर्मकांड से जुड़ा हुआ है और अगर एक-दो के द्वारा कोई गलती होती भी है तो उसको पूरे समाज से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

चमोली ने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को उचित करार देते हुए सही दिशा मे बताया और कहा कि उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर ये बात कही है, जिसको यथार्थ रूप में स्वीकारे जाने की जरूरत है।

वहीं उन्होंने गणेश गोदियाल के बयान पर कहा कि उन्होंने मुझे नसीहत देने का प्रयास किया है। जिसमें गोदियाल द्वारा कहा गया कि अगर बेटा गलती करता है तो क्या बाप पकड़ा जाएगा? उन्होंने कहा, यही सवाल मेरा कांग्रेस से था और लगता है वो सही बात समझ पाए हैं। उन्होंने कहा कि आज जब अयोध्या में चोरी हुई है या बद्रीनाथ में इस तरह की घटनाएं हुई हैं, फिर मुख्यमंत्री को, प्रधानमंत्री को और बीकेटीसी अध्यक्ष को टारगेट करने का कोई कारण नहीं बनता है। क्योंकि जो आरोपी हैं, उसके ऊपर जांच चल रही है और जांच के बाद कार्रवाई होगी। फिर भी कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री, सरकार, मंदिर समिति को दोषी ठहराया जा रहा है। ऐसे में उनके द्वारा भी यही कहा गया था कि जिस व्यक्ति को उन्होंने स्थाई किया है, उस व्यक्ति ने बाद में ये कांड किया है। तो उनके कार्यकाल की भी जांच होनी चाहिए और उन्होंने उसको स्थाई किया इसलिए उनको माफी मांगनी चाहिए। ऐसे में उनके वर्तमान बयान के आधार पर अगर वो उसमें दोषी नहीं है तो बाकी लोग कैसे दोषी हो जाते हैं? लिहाजा कांग्रेस ये जो डबल स्टैंडर्ड को अपनाती है उसी पर उनका कहना था, कि अपने लिए तो कुछ और और भाजपा के लिए कुछ और, ये डबल स्टैंडर्ड नहीं होना चाहिए। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष अगर ये मानते हैं कि जिस नौटियाल ने गलती की है, उनको स्थाई करने में उनका कोई दोष नहीं था। तो उनको ये भी मानना पड़ेगा कि अगर राम मंदिर या बद्रीनाथ धाम में कोई चोरी हुई है और उनके चोरों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। तब प्रधानमंत्री से सवाल नहीं करने चाहिए, मुख्यमंत्री मंदिर समिति अध्यक्ष को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। अगर उनसे सवाल नहीं होते, फिर गणेश गोदियाल के खिलाफ भी सवाल नहीं बनता है, लेकिन अगर उनसे सवाल किए जाते हैं, तो गणेश गोदियाल की भी जवाबदेही बनती है, उनको भी जवाब देने की आवश्यकता है।

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